गाजियाबाद
एनजीटी मामले में पचहरा व नौरसपुर खनन स्थलों की संयुक्त जांच, 21 जनवरी को आएगा फैसला
टीम आने की सूचना मिलते ही खनन कार्य बंद

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : दिल्ली और गाजियाबाद के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने शनिवार को पचायरा और नौरसपुर स्थित यमुना खादर के खनन स्थलों का निरीक्षण किया। यह जांच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दायर एक याचिका के संबंध में की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पचायरा निवासी बिट्टू पुत्र लीलू सिंह ने कुछ समय पूर्व एनजीटी में याचिका दाखिल कर यमुना नदी के तल में अवैध खनन किए जाने का आरोप लगाया था। इस मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को निर्धारित है। याचिका में अवैध खनन से संबंधित फोटो और अन्य साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए थे, जो पहले सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं और जिन पर मीडिया में भी समाचार प्रकाशित हुए थे।
शिकायत की सत्यता की जांच के लिए गठित इस संयुक्त टीम में दिल्ली से डीएम, एसडीएम और तहसीलदार, जबकि गाजियाबाद से एडीएम और खनन अधिकारी शामिल थे। टीम ने दोनों राज्यों की सीमा से सटे खनन क्षेत्रों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया।
उल्लेखनीय है कि 17 जनवरी 2026 को सुबह से ही दोनों खदानों में खनन कार्य बंद पाया गया। विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि संयुक्त जांच टीम के आने की सूचना पहले ही खनन पट्टा धारकों तक पहुंच गई थी। आरोप है कि गाजियाबाद के खनन विभाग से जुड़े अधिकारियों द्वारा यह जानकारी पहले ही साझा कर दी गई, ताकि संबंधित लोग स्वयं को सुरक्षित कर सकें। हालांकि, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि खनन व्यवसाय से जुड़े लोगों के प्रभाव के चलते उन्हें प्रशासनिक गतिविधियों की पूर्व जानकारी स्वतः ही मिल जाती है।
यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि पुलिस, खनन विभाग और राजस्व विभाग की कथित सांठगांठ के कारण यमुना खादर में लंबे समय से बड़े पैमाने पर रेत खनन किया जा रहा है। शिकायतों के बावजूद विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक कि ग्रैप-3 और ग्रैप-4 जैसे प्रतिबंध लागू होने के बावजूद खनन कार्य दिन-रात जारी रहने के आरोप हैं।
अब सभी की निगाहें इस संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसे एनजीटी में 21 जनवरी को प्रस्तुत किया जाना है। इसी रिपोर्ट के आधार पर ट्रिब्यूनल कोर्ट द्वारा आगे के आदेश जारी किए जाएंगे।



