कैराना
एसआईआर में लापरवाही पर प्रशासन सख्त, सुनवाई में 50 में से 30 नदारद

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कैराना। मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तहत निर्धारित समय सीमा में फॉर्म जमा न करने वाले मतदाताओं के खिलाफ जारी नोटिसों पर गुरुवार से तहसील मुख्यालय में सुनवाई शुरू कर दी गई। पहले ही दिन यह साफ हो गया कि बड़ी संख्या में लोग अब भी इस प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
तहसील क्षेत्र में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान फॉर्म न भरने वाले कुल 17,542 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें से पहले चरण में 50 लोगों को सुनवाई के लिए तहसील मुख्यालय बुलाया गया था, लेकिन इनमें से केवल 20 नोटिस धारक ही अपने दस्तावेज लेकर पहुंचे। शेष 30 लोग नदारद रहे। सुनवाई के दौरान जांच में सामने आया कि उपस्थित 20 नोटिस धारकों में से भी सिर्फ 8 के दस्तावेज ही पूरे और मानकों के अनुरूप पाए गए। शेष 12 लोगों के कागजात अधूरे या नियमों के मुताबिक नहीं थे। ऐसे सभी लोगों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अगली सुनवाई में सभी आवश्यक अभिलेखों के साथ अनिवार्य रूप से उपस्थित हों, अन्यथा उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है, लेकिन इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन मतदाताओं ने समय रहते फॉर्म नहीं भरे और अब भी सुनवाई में रुचि नहीं दिखा रहे हैं, उनके खिलाफ नियमों के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे। एसडीएम कैराना निधि भारद्वाज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रतिदिन लगभग 150 लोगों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। सुनवाई प्रातः 11 बजे से शाम तक चलेगी। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के पास एसआईआर के अनुसार सभी वैध दस्तावेज उपलब्ध होंगे, उनका मौके पर ही सत्यापन कर उन्हें राहत दी जाएगी, लेकिन अधूरे कागजात या टालमटोल किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। एसडीएम ने यह भी चेतावनी दी कि नोटिस जारी होने के बावजूद सुनवाई में अनुपस्थित रहना मतदाताओं के लिए भारी पड़ सकता है। यह प्रक्रिया केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि मतदाता सूची को दुरुस्त रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी नोटिस धारकों से अपील की कि वे समय पर तहसील पहुंचकर अपने दस्तावेज प्रस्तुत करें। प्रशासन की सख्ती से यह संकेत साफ है कि आने वाले दिनों में सुनवाई के दौरान और भी कड़े फैसले लिए जा सकते हैं। अब यह मतदाताओं पर निर्भर करता है कि वे समय रहते दस्तावेज पूरे कर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं या फिर कार्रवाई का सामना करते हैं।
