मुरादाबाद

मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की लापरवाही के कारण हजारों वर्ग मीटर जमीन बनी कूड़ा दान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मुरादाबाद। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की लापरवाही के चलते महानगर के मंझोली इलाके में प्राधिकरण की 10 हजार वर्ग मीटर जमीन आज कूड़ा घर बनकर रह गई है। प्राधिकरण के अधिकारी इस महंगी जमीन पर कोई योजना जनता के लिए नहीं विकसित कर रहे हैं। जिसके कारण अब इस जमीन पर वहाँ के निवासियों ने कूड़ा फेंकना शुरू कर दिया है और स्थानीय लोगों ने इसे बालीवाॅल का मैदान भी बना दिया है प्राधिकरण अधिकारियों की लापरवाही के कारण प्राधिकरण की कई योजनाएं खंडहर में बदल गयी है। शायद कमीशन के बड़े खेल के कारण भ्रष्टाचार में डूबे अधिकारियों के कारण प्राधिकरण का करोड़ों रुपए बर्बाद कर दिया गया है। इस गंभीर मामलों को कोई भी बड़ा अधिकारी देख नहीं रहा है।प्राधिकरण के नुकसान से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। आला अफसरों को जो मर्ज़ी में आता है वह करते हैं। प्राधिकरण की कई योजनाएँ खंडहर होती जा रही हैं इन योजनाओं में बेशकीमती बहुमंजिलें इमारतें आवंटियों की प्रतीक्षा में खंडहर हो गई हैं इन योजनाओं पर प्राधिकरण का करोड़ों रुपए खर्च हुएं हैं। पूर्व में तैनात रहे यहाँ प्राधिकरण उपाध्यक्ष से लेकर अभियंता तक अपना अपना लाभ लेकर प्राधिकरण बजट को बंदरबाँट कर चलते बने हैं।
प्राधिकरण अधिकारियों की लापरवाही के चलते मंझोली इलाके में प्राधिकरण की दस हजार वर्ग मीटर बेशकीमती जमीन लावारिस की तरह पडीं हुई है आज इस योजना पर लोगों ने कूड़ा कचरा फेंकना शुरू कर दिया है और स्थानीय युवकों ने इसे खेल मैदान में तब्दील कर दिया है। इस जमीन के बारे में जानकारी जुटाई गई तो पता लगा कि दस साल पूर्व  प्राधिकरण के तत्कालीन अधिकारियों ने उस समय की सपा सरकार की महत्वपूर्ण समाजवादी आवास योजना के लिए इस जमीन पर दो मई 2015 को प्राधिकरण ने तीन मंजिला एल आई जी फ्लैट के निर्माण की योजना का शिलान्यास पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों से कराया था जिसका शिलापट  लगा हुआ है। इस योजना के निकटवर्तीय लोगों का कहना है कि इस जमीन का भूमि पूजन तत्कालीन ताकतवर मंत्री शिवपाल यादव ने किया था प्राधिकरण ने इस योजना को कवर करते हुए दो तरफा चाहरदिवारी का निर्माण कराया था। जैसे ही अखिलेश सरकार गयी और योगी सरकार आई वैसे ही प्राधिकरण अधिकारियों की निष्ठा भी बदल गयी और समाजवादी आवास योजना प्राधिकरण अधिकारियों ने किनारे कर दी और वर्तमान में प्राधिकरण के अधिकारी यह भी भूल गए कि मंझोली में उनकी बेशकीमती जमीन भी पडी़ हुई है। प्राधिकरण अधिकारियों की लापरवाही के चलते इस बेशकीमती जमीन पर प्राधिकरण ने मध्यम वर्ग व निम्न वर्ग के लोगों के लिए किसी भी तरह की कोई अन्य योजना विकसित नहीं की है। आज वर्तमान में इस स्थान पर बनी हुई चाहरदिवारी को ध्वस्त भी कर दिया गया है। लावारिस पडी़ हुई इस जमीन को स्थानीय लोगों ने कूड़ा घर में तब्दील कर दिया है। यहाँ के निवासियों ने जानकारी देते हुए बताया इस योजना से पहले यहाँ किसानों के खेत थे  सन 2015 में प्राधिकरण ने समाजवादी योजना में मकान बनाने के लिए इन जमीनों को अधिग्रहण किया था। अब देखना है कि यह जमीन ऐसे ही कूड़ा घर में तब्दील पडी़ रहेगी या फिर शहरवासियों के लिए कोई योजना तैयार की जायेगी।
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