गोड्डा
हूल विद्रोह के महान क्रांतिवीर शहीद चानकु महतो के 210वां जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा। सदर प्रखंड के रंगमटिया गांव में चानकु महतो 210वां जयंती के अवसर पर फूल, माला, धूप, अगरबत्ती, तेल, पानी चढाकर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। चानकु महतो का जन्म 09 फरवरी 1816 को गोड्डा जिला के रंगमटिया गाँव में हुआ था और ब्रिटिश सरकार के हाथों 15 मई 1856 को गोड्डा राजकचहरी में सरेआम फांसी दी जाती है।वह अपने आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के प्रधान थे कुड़मी समाज के परगनैत थे। चानकू महतो का जन्म 09 फरवरी 1816 को रंगमटिया गाँव (गोड्डा जिला) में हुआ था । इनके पिता का नाम कारू महतो उर्फ कालू महतो और माता का नाम बड़की माहताइन था। चानकू महतो ने संथाल हुल (1855-56) में सिद्धू-कान्हू को नेतृत्वकर्ता मानते हुए, विद्रोह का समर्थन किए थे। 30 जून 1855 ई. को भगनीड़ीह (संथाल परगना जिलान्तर्गत राजमहल सबडिवीजन के दामीन इलाकों के मध्य बाराहाइत/बड़हैत के समीप स्थित मुर्मू बंधुओं का गाँव में 400 गाँवों के करीब 60 हजार संथाल, कुड़मि व अन्य आदिवासियों समेत स्थानीय लोग एकत्र हुए और हुल-हुल के एक स्वर से सशस्त्र विद्रोह का निर्णय लिया। इस सभा में सिदो मुर्मू को राजा, कान्हू को मंत्री, चाँद को प्रशासक तथा भैरव को सेनापति चुना गया। चालो जुलाहा, रामा गोप, राजवीर सिंह, बैजल बाबा, भागीरथ मांझी, बलुआ महतो आदि इनके प्रमुख साथी थे। चानकू महतो का नारा था :-आपोन माटी, आपोन दाना,पेट काटी नाँय देब खजाना..! चानकू महतो को 15 मई 1856 ई को अंग्रेज़ों द्वारा सरेआम राजकचहरी के बगल में कझिया नदी के पास फाँसी दे दिया। मौके पर हूल फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष संजीव कुमार महतो, पूर्व जिला परिषद सदस्य देवेंद्र कुमार महतो, शेखर मंडल, रजनीकांत महतो, मालेश्वर महतो, कुड़मी विकास मोर्चा जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार महतो, निताय महतो, हरेकृष्ण मेलर, संजीव कर्ण, जयप्रकाश सिंह, पंकज सिंह, जय कृष्ण दास, बजरंग कुमार महतो, रघुवंश महतो, दीपक कुमार महतो, संदीप महतो, रमेश कुमार महतो, गौतम कुमार महतो, दिलीप महतो, दशरथ महतो, सोनू महतो, प्रेमलता महतो सैकड़ो महिला पुरुष उपस्थित थे।



