
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। जिले में नकली खाद के उपयोग से किसानों की फसलें पूरी तरह नष्ट होने का गंभीर मामला सामने आया है। इसको लेकर प्रभावित किसानों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपते हुए उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई तथा पीडि़त किसानों को तत्काल मुआवजा और राहत प्रदान किए जाने की मांग की है। शिकायत में किसानों ने बताया कि खरीफ/रबी सीजन के दौरान उन्होंने स्थानीय बाजार से खाद क्रय की थी, जिसे खेतों में निर्धारित मात्रा में प्रयोग किया गया। प्रारंभ में फसल की बढ़वार सामान्य प्रतीत हुई, किंतु कुछ ही दिनों बाद खेतों में हरियाली की जगह फसल पीली पडऩे लगी, पौधे सूखने लगे और अंतत: पूरी फसल नष्ट हो गई। किसानों का आरोप है कि प्रयोग में लाई गई खाद नकली अथवा अमानक थी, जिसके कारण उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया। किसानों के अनुसार, जिन परिवारों की आजीविका पूरी तरह खेती पर निर्भर है, उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। फसल खराब होने से न केवल उनकी आमदनी समाप्त हो गई, बल्कि कर्ज चुकाने की क्षमता भी प्रभावित हुई है। कई किसानों ने केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) व निजी स्रोतों से ऋण लेकर खेती की थी, जो अब भारी बोझ बन गया है। स्थिति यह है कि बच्चों की पढ़ाई, घर-परिवार का खर्च और आगामी खेती की तैयारी तक संकट में पड़ गई है। शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि फसल नष्ट होने के बावजूद अभी तक न तो बीमा कंपनियों से कोई क्षतिपूर्ति मिली है और न ही किसी सरकारी योजना के तहत राहत। किसानों ने आशंका जताई है कि यदि शीघ्र सहायता नहीं मिली तो अनेक किसान गंभीर मानसिक तनाव में आ सकते हैं, जिसका असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ेगा। पीडि़त किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित कर प्रभावित खेतों का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए तथा प्रयोग में लाई गई खाद के नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाए। यदि खाद अमानक अथवा नकली पाई जाती है तो उर्वरक नियंत्रण आदेश के अंतर्गत संबंधित विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। किसानों ने यह भी मांग की है कि फसल क्षति का वास्तविक आकलन कर उन्हें शीघ्र व सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए। साथ ही, फसल नष्ट होने के कारण किसानों पर चढ़े ऋण की किश्तों पर तत्काल रोक (मोराटोरियम) लगाई जाए तथा ब्याज में छूट प्रदान की जाए, जिससे वह कुछ राहत महसूस कर सकें। वहीं, किसानों ने भी इस मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई और किसानों को राहत नहीं मिली तो वे मजबूरन सड़कों पर उतरेंगे। कुल मिलाकर, नकली खाद का यह मामला न केवल किसानों की आर्थिक तबाही का कारण बना है, बल्कि कृषि व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कितनी तेजी और संवेदनशीलता से कार्रवाई करता है। ज्ञापन देते समय तहसील महरौनी के ग्राम पठा निवासी किसानों में रामलखन, बारेलाल, खलक सिंह यादव, हरीशंकर, मिथलेश, पप्पू, डमरू, हरिश्चंद्र, गजेन्द्र यादव, छन्नूलाल, रूपलाल, मानसिंह, मिथलेश, राधे, धनीराम, शिवसहाय, दीपक, किशोरीलाल, कनई के अलावा अनेकों किसान मौजूद रहे।