गाजियाबाद
जीरो टॉलरेंस सिर्फ नारा, ज़मीन पर भू-माफियाओं का राज
शिकायतें दबा रहे अफसर, हाईकोर्ट के आदेश भी लोनी में बेअसर

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : प्रदेश सरकार भले ही ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का ढिंढोरा पीटती हो, लेकिन लोनी तहसील में हकीकत इससे ठीक उलट नजर आ रही है। यहां सरकारी जमीन पर भू-माफियाओं का कब्जा, अवैध बिक्री और निर्माण का खेल खुलेआम चल रहा है, जबकि जिम्मेदार अफसर मूक दर्शक बने बैठे हैं।
मामला ग्राम घरोटी खुर्द, आर्य नगर औद्योगिक क्षेत्र की खसरा संख्या 80/3/2 की बंजर और सरकारी भूमि का है। भारतीय किसान संघ ने पहले ही एसडीएम को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि भू-माफियाओं ने इस जमीन पर कब्जा कर उसे बेच दिया और निर्माण कार्य भी शुरू करा दिया। संगठन ने कब्जा मुक्त कर सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
इसी प्रकरण में हिंदू वाहिनी के निवर्तमान मंत्री शुभम कुमार ने अपने कार्यालय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासनिक कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की छवि को कुछ भ्रष्ट अधिकारी खुद ही पलीता लगा रहे हैं। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें 90 दिनों के भीतर सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाने और लेखपाल को 60 दिन में आरसी फॉर्म-19 के जरिए रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
शुभम कुमार का आरोप है कि 27 अगस्त को शिकायत देने के बावजूद क्षेत्रीय लेखपाल ने अपने स्वार्थ में कार्रवाई करने के बजाय शिकायत को दबा दिया। बाद में एसडीएम स्तर पर जांच टीम मौके पर पहुंची, लेकिन अवैध निर्माण रोकने के बजाय कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई। यहां तक कि टीम पर निर्माणकर्ता को कानूनी दांव-पेंच बताकर मामले को उलझाने की सलाह देने की चर्चाएं भी हैं।
तहसील से निराश होकर शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी कार्यालय का दरवाजा खटखटाया। डीएम ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन एक सप्ताह बीतने के बाद भी जमीन पर हालात जस के तस हैं। आरोप है कि प्रशासन की सुस्ती का फायदा उठाकर भू-माफिया बाकी जमीन भी बेचने की फिराक में हैं।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या ‘जीरो टॉलरेंस’ सिर्फ भाषणों तक सीमित है? अगर हाईकोर्ट के आदेश और शिकायतें भी फाइलों में दबती रहेंगी, तो भू-माफियाओं के हौसले आखिर क्यों नहीं बढ़ेंगे? फिलहाल, जनता कार्रवाई का इंतजार कर रही है, क्योंकि कानून का डर खत्म होते ही सरकारी जमीनें सबसे आसान शिकार बन जाती हैं।



