असम में दिल्ली के दो गुना वन भूमि पर अतिक्रमण, सीएम सरमा का सनसनीखेज खुलासा।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम में 2,676 वर्ग किलोमीटर जंगल भूमि पर अवैध कब्जा है, जो दिल्ली के क्षेत्रफल से लगभग दोगुना है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर इस संकट की भयावहता उजागर की। उन्होंने लिखा, “पूर्व कांग्रेस सरकार द्वारा सौंपी गई समस्या की गहराई समझने वालों के लिए: 2,676 वर्ग किमी वन भूमि अतिक्रमण में डूबी हुई है—दिल्ली से दोगुना क्षेत्र! भाजपा असम सरकार इसे सुधारने में जुटी है।”यह बयान सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के तीन दिन बाद आया। अदालत ने असम सरकार को 3,60,000 हेक्टेयर से अधिक आरक्षित वन भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने का हरा झंडा दिखाया। राज्य द्वारा विकसित तंत्र को मान्यता देते हुए न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और अलोक अराधे की पीठ ने निर्देश दिए कि अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी हो। उन्हें दावे के समर्थन में दस्तावेज पेश करने का अवसर मिलेगा। अवैध कब्जे पर तर्कपूर्ण आदेश जारी कर 15 दिन में खाली करने का समय दिया जाएगा। पीठ ने स्पष्ट कहा कि वन भूमि अतिक्रमण पर्यावरण शासन की सबसे गंभीर चुनौती बन चुका है। संविधान राज्य पर वनों और पर्यावरण की रक्षा का “स्पष्ट और निर्विवाद दायित्व” थोपता है, लेकिन विधि और निष्पक्षता के साथ। वन राष्ट्र के सर्वोच्च प्राकृतिक संसाधन हैं, जिनकी रक्षा करना अनिवार्य है। सीएम सरमा ने उपलब्धियां गिनाईं: हाल के वर्षों में 1.25 लाख बीघा वन भूमि मुक्त कराई गई। फिर भी, राज्य में 26-27 लाख बीघा पर कब्जा बरकरार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 6-7 लाख बीघा पात्र आदिवासी वनवासियों के कब्जे में है, जिन्हें कानूनी प्रावधानों के तहत वन पट्टा प्रदान किया जाएगा। “पात्र वनवासियों की भूमि घटाने पर करीब 20 लाख बीघा शेष अतिक्रमण है, जिसे हम वापस लेंगे,” सीएम सरमा ने कहा। भाजपा सरकार का यह अभियान असम के पारिस्थितिकी संतुलन को बहाल करेगा। पूर्व कांग्रेस शासन में लापरवाही से उपजी समस्या अब सुलझने की कगार पर है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला पर्यावरण प्रेमियों के लिए राहत है। असम सरकार प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।



