बरेली

गलतफहमियों और हास्य के ताने-बाने से गूंजे ठहाके

रिद्धिमा में हुआ हास्य नाटक 'दूल्हा भाई' का भव्य मंचन

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली। एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार की शाम उस समय हंसी के ठहाकों से गूँज उठी, जब “विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान, प्रयागराज” के कलाकारों ने बहुचर्चित हास्य नाटक “दूल्हा भाई” का मंचन किया। मूल रूप से मराठी भाषा के इस प्रसिद्ध नाटक का हिंदी रूपांतरण गंगाधर परांजपे द्वारा किया गया है, जिसे संस्थान के कलाकारों ने अपनी जीवंत अदाकारी से यादगार बना दिया। नाटक की कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार की है, जहां बेटी के विवाह को लेकर माता-पिता की अलग-अलग योजनाएं भारी मुसीबत बन जाती हैं। कथानक उस समय रोचक मोड़ लेता है, जब पति और पत्नी, एक-दूसरे से छिपाकर, अपनी-अपनी पसंद के लड़कों को बेटी देखने के लिए एक ही समय पर आमंत्रित कर बैठते हैं। ​जैसे ही दोनों पक्ष के लोग एक साथ घर में आते हैं, मंच पर ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’ (भूल-चूक) का जो सिलसिला शुरू होता है, उसने दर्शकों को पेट पकड़कर हंसने पर मजबूर कर दिया। अपनी गलती और बदइंतजामी को छिपाने के लिए पात्रों द्वारा रचे गए झूठ और बहाने, स्थिति को और भी पेचीदा और हास्यास्पद बना देते हैं। नाटक में दोनों लड़कों (उम्मीदवारों) द्वारा लड़की को रिझाने के प्रयास और उस होड़ में की गई मूर्खतापूर्ण हरकतें दर्शकों के मनोरंजन का केंद्र रहीं। नाटक के ‘स्वप्न दृश्य’ विशेष रूप से प्रभावी रहे, जिसने कथानक में फैंटसी और रियलिटी का एक अनूठा मिश्रण पेश किया। तमाम उठापटक और गुदगुदाने वाली परिस्थितियों से गुजरते हुए नाटक एक आश्चर्यजनक और सुखद अंत तक पहुंचता है, जहां दूल्हा वही बनता है जिसे किसी ने सोचा भी नहीं था।वरिष्ठ रंगकर्मी अजय मुखर्जी की परिकल्पना और निर्देशन में सजे इस नाटक में हर पात्र अपनी भूमिका में सटीक बैठा। सभी ने न केवल हास्य का संतुलन बनाए रखा, बल्कि नाटक की गति को भी अंत तक बांधे रखा। मंच पर अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने वाले कलाकारों में अभिलाष नारायण, निवेदिता दास गुप्ता, आशू, तुषार सौरभ, मधुरिमा बोस, प्रतीक कुमार सिंह, गजेन्द्र यादव, शुभम श्रीवास्तव एवं उत्कर्ष जायसवाल शामिल थे। कलाकारों की कॉमिक टाइमिंग और संवाद अदायगी ने नाटक को सजीव कर दिया।मंच के परे तकनीकी पक्ष भी उतना ही सशक्त रहा। सुजॉय घोषाल की प्रकाश व्यवस्था ने दृश्यों के मूड को बखूबी उभरा, वहीं शुभम वर्मा और दिव्यांश राज गुप्ता के संगीत ने हास्य के पलों को और गहरा किया।कार्यक्रम के अंत में दर्शकों की भारी भीड़ और तालियों की गड़गड़ाहट ने यह साबित कर दिया कि साफ-सुथरा और स्तरीय हास्य आज भी रंगमंच की जान है। इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चैयरमेन देव मूर्ति जी, आशा मूर्ति जी, आदित्य मूर्ति जी, ऋचा मूर्ति जी, देविशा मूर्ति जी, सुभाष मेहरा, डा. प्रभाकर गुप्ता, डा. अनुज कुमार, डा. शैलेश सक्सेना, डा. आशीष कुमार, डा. रीता शर्मा एवं शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button