
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली । सिंगरौली जिले की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों और तकनीकी समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। ‘आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ’ (सम्बद्ध भारतीय मजदूर संघ) द्वारा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें ‘पोषण ट्रैकर’ ऐप में अनिवार्य की गई फेस कैप्चर प्रणाली को बंद करने और मानदेय बढ़ाने जैसी कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं।
तकनीकी जटिलताओं से बढ़ा मानसिक तनाव
ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पोषण ट्रैकर ऐप में ई-केवाईसी और बार-बार फेस कैप्चर (चेहरा स्कैन करने) की प्रक्रिया से वे बेहद परेशान हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि:
ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की भारी समस्या के कारण एक केवाईसी के लिए चार-पांच बार चक्कर लगाने पड़ते हैं।
हितग्राहियों (विशेषकर पुरुषों) का फेस कैप्चर करने के लिए उन्हें सुबह-देर शाम तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा और गरिमा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुरानी तकनीक और खराब मोबाइल फोन के कारण कार्य की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है।
प्रमुख मांगें: सरकारी कर्मचारी का दर्जा और बेहतर सुविधाएं
संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो कार्यकर्ता सामूहिक इस्तीफे की राह पर जा सकती हैं। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
नियमितीकरण: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
फेस कैप्चर पर रोक: पोषण ट्रैकर ऐप से फेस कैप्चर की अनिवार्यता को तत्काल खत्म किया जाए।
संसाधनों का उन्नयन: पुराने खराब मोबाइल के बदले उच्च गुणवत्ता वाले 5G मोबाइल उपलब्ध कराए जाएं।
पदोन्नति और वेतन: अनुभव और योग्यता (सीनियरिटी व ग्रेजुएशन) के आधार पर पर्यवेक्षक पद पर पदोन्नति दी जाए और जब तक पदोन्नति न हो, तब तक बढ़ा हुआ वेतनमान दिया जाए।
अवकाश एवं बीमा: गर्मी की छुट्टियों (3 माह) का प्रावधान हो और कार्यकर्ताओं को पीएफ (PF) व बोनस की सुविधा मिले।
स्थानीय बुनियादी ढांचा: जर्जर आंगनवाड़ी केंद्रों की मरम्मत, बिजली कनेक्शन, स्वच्छ पेयजल और शौचालय की व्यवस्था की जाए।
रुके हुए भुगतान पर आक्रोश
कार्यकर्ताओं ने शिकायत की है कि 1 अप्रैल 2022 से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि (250/- और 100/- रुपये) का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। साथ ही, ‘मंगल दिवस’ की राशि भी पिछले एक साल से बकाया है।
“हम 1975 से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज हमें तकनीकी बोझ और व्यवस्थाओं की कमी के चलते टॉर्चर किया जा रहा है। यदि हमारी गरिमा सुरक्षित नहीं रही, तो हम काम छोड़ने पर मजबूर होंगे।” – ज्ञापन का मुख्य अंश
आंगनवाड़ी संघ ने मांग की है कि मानदेय का भुगतान हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच सुनिश्चित किया जाए ताकि कार्यकर्ताओं को आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।



