बागपत

नवजात शिशुओं की सुरक्षा

रंग, संक्रमण, शोर और लापरवाही से बचाना है ज़रूरी

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र मलिक की विस्तृत सलाह
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। त्योहार खुशियों, मेल-मिलाप और उत्साह का प्रतीक हैं, लेकिन जब घर में नवजात शिशु हो तो जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। डॉ. जितेंद्र मलिक का कहना है कि जीवन के पहले 28 दिन (नियोनेटल पीरियड) शिशु के लिए सबसे संवेदनशील होते हैं। इस दौरान थोड़ी सी असावधानी भी गंभीर परिणाम दे सकती है।
 1. रंग और रासायनिक संपर्क से खतरा
बाजार में मिलने वाले अधिकतर रंगों में कृत्रिम डाई, एसिडिक तत्व और भारी धातुएँ पाई जाती हैं।
नवजात की त्वचा बहुत पतली होती है, जिससे केमिकल तेजी से असर कर सकते हैं।
त्वचा पर एलर्जी, जलन, फफोले और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
आंखों में रंग जाने पर कॉर्नियल इन्फेक्शन तक हो सकता है।
सलाह: शिशु को रंग खेलने वाले वातावरण से पूरी तरह दूर रखें।
 2. संक्रमण: अदृश्य लेकिन गंभीर खतरा
नवजात की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं होती।
भीड़भाड़, बार-बार गोद बदलना संक्रमण का कारण बन सकता है।
सामान्य सर्दी-जुकाम भी नवजात में निमोनिया का रूप ले सकता है।
बाहर से आने वाले व्यक्ति हाथ धोकर ही शिशु को छुएं।
डॉ. मलिक बताते हैं कि RSV, फ्लू और वायरल संक्रमण नवजात के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं यदि समय पर उपचार न मिले।
 3. तेज आवाज और मानसिक प्रभाव
त्योहारों में डीजे, पटाखे और लाउडस्पीकर आम हैं।
नवजात के कान अत्यंत संवेदनशील होते हैं।
अचानक तेज आवाज से शिशु घबराहट, अनियमित सांस और तेज रोने की स्थिति में आ सकता है।
लगातार शोर से नींद का चक्र बिगड़ता है, जो मस्तिष्क विकास पर असर डाल सकता है।
 4. तापमान और मौसम का संतुलन
शिशु के शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता सीमित होती है।
अचानक ठंड या गर्मी में ले जाना जोखिमपूर्ण है।
एसी और बाहर के तापमान में अंतर से सर्दी-खांसी हो सकती है।
हल्के, मुलायम और मौसम अनुसार कपड़े पहनाना चाहिए।
 5. स्तनपान और मां की सेहत
नवजात का सर्वोत्तम आहार मां का दूध है।
त्योहारों में मां का भोजन और आराम प्रभावित न हो।
पर्याप्त पानी और पौष्टिक आहार लें।
मानसिक तनाव भी दूध की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।
 6. त्वचा और स्वच्छता
सुगंधित लोशन, पाउडर और केमिकल युक्त उत्पादों से बचें।
केवल चिकित्सकीय सलाह से उत्पाद इस्तेमाल करें।
कपड़े मुलायम और धुले हुए हों।
 7. आपात स्थिति के संकेत पहचानें
यदि शिशु में निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
तेज बुखार या असामान्य ठंडापन
दूध पीने से इंकार
सांस लेने में कठिनाई
त्वचा का नीला पड़ना
लगातार रोना या अत्यधिक सुस्ती
 8. परिवार की भूमिका
डॉ. जितेंद्र मलिक कहते हैं,
“नवजात केवल मां-पिता की नहीं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। उत्सव मनाएं, लेकिन शिशु की सुरक्षा सर्वोपरि रखें।”
परिवार के सदस्य सजग रहें, भीड़ नियंत्रित रखें और शिशु को शांत वातावरण दें।
त्योहार जीवन में रंग भरते हैं, लेकिन नवजात शिशु की दुनिया अभी कोमल और संवेदनशील है। सावधानी, स्वच्छता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करके ही हम खुशियों को सुरक्षित रख सकते हैं।
नवजात की मुस्कान सबसे बड़ा उत्सव है — उसे सुरक्षित रखना हमारी पहली जिम्मेदारी है।
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