
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र स्थित बछगांव में अनोखी ‘जूता होली’ मनाई गई। ब्रज की विविध होली परंपराओं के बीच यह अनूठी रस्म बरसों से निभाई जा रही है। इस दौरान आस-पास के इलाकों से भारी संख्या में लोग इसे देखने पहुंचे। जबकि जूते मारना अपमानजनक माना जाता है, लेकिन बछगांव में यह आशीर्वाद और शुभकामनाओं का प्रतीक है। इस परंपरा के तहत, होली के दिन गांव के बड़े-बुजुर्ग अपने से छोटों को जूते-चप्पल मारकर बधाई देते हैं। जिसे यह ‘मार’ पड़ती है, वह इसे सौभाग्य मानकर बड़ों का आभार व्यक्त करता है। ग्रामीणों के अनुसार, यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। इसका मुख्य उद्देश्य आपसी भेदभाव और अहंकार को समाप्त कर सौहार्द बढ़ाना है। इस दौरान बड़े-बुजुर्गों द्वारा छोटों पर चलाए गए जूतों में मार से अधिक दुलार की भावना होती है। गांव की चौपालों और गलियों में युवा टोलियां बनाकर बुजुर्गों के सामने नतमस्तक होकर इस ‘प्रसाद’ को स्वीकार करते हैं। जब पूरे ब्रज में अबीर-गुलाल से होली खेली जा रही थी, तब बछगांव में यह अनूठी परंपरा जीवंत थी। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यह रस्म गांव की एकता और सौहार्द को बनाए रखने में सहायक है। युवा पीढ़ी को भी अपने बुजुर्गों से इस प्रकार की ‘बधाई’ प्राप्त होने पर गर्व का अनुभव होता है।



