बरेली
बड़े उद्योगों के आसपास प्रदूषण जांच नहीं की जाती- पर्यावरण मंत्री
औद्योगिक क्षेत्र में विशेष निगरानी की आवश्यकता

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली : सांसद नीरज मौर्य ने बरेली और बदांयूं जिलों में उर्वरक संयंत्रों और रासायनिक उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्टों के कारण भूजल में फ्लोराइड और अमोनिया के स्तर को लेकर लोकसभा में सरकार से पूछा कि क्या केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इफको जैसे बड़े उद्योगों के आसपास की मिट्टी और भूजल की विषाक्तता की कोई जांच की है । सांसद ने इस क्षेत्र में बढ़ रहे कैंसर और किडनी के रोगों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या सरकार इस क्षेत्र को गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्र घोषित करने पर विचार कर रही है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा दिए गए उत्तर से पता चला कि सरकार के पास उद्योगों के ठीक पास के क्षेत्र का कोई विशिष्ट डेटा ही उपलब्ध नहीं है। सरकार ने अपने जवाब में कहा कि केंद्रीय भूजल बोर्ड केवल क्षेत्रीय स्तर पर डेटा तैयार करता है और इफको जैसे बड़े संयंत्रों के आसपास की विशिष्ट स्थिति की कोई विशेष निगरानी नहीं की गई है।
सांसद नीरज मौर्य का कहना है कि जहां स्थानीय जनता प्रदूषण की मार झेल रही है, वहीं सरकार के पास औद्योगिक इकाइयों के पास रहने वाली आबादी के स्वास्थ्य और जल की गुणवत्ता को लेकर कोई विशेष अध्ययन नहीं है। सांसद मौर्य द्वारा प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर लगाए गए जुर्माने और मुआवजे के सवाल पर भी सरकार ने कोई स्पष्ट राशि साझा नहीं की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल व्यापक सूचकांक (सीईपीआई) की गणना करना पर्याप्त नहीं है जब तक कि स्थानीय स्तर पर उल्लंघन करने वाली इकाइयों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई न की जाए । सांसद का कहना है कि संचयी पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन के बिना क्षेत्र को प्रदूषित श्रेणी में न डालना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है, जबकि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। क्षेत्रीय निगरानी के बजाय औद्योगिक क्लस्टरों के पास गहन जांच की आवश्यकता है।


