बागपत

किन्नर मांगते हैं सबकी दुआ

बड़ौत में गुरु राजवीर पांचाल और मुख्य किन्नर चांदनी किन्नर से भावनात्मक बातचीत

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत : समाज की भीड़ में कुछ चेहरे ऐसे भी होते हैं जिन्हें हम रोज देखते तो हैं, लेकिन सच में समझने की कोशिश बहुत कम करते हैं। उन्हीं चेहरों में एक चेहरा किन्नर समाज का भी है। अक्सर लोग उन्हें तालियों की आवाज, नेग और आशीर्वाद तक ही सीमित समझ लेते हैं, लेकिन उनके जीवन की पीड़ा, संघर्ष और संवेदनाओं को बहुत कम लोग महसूस कर पाते हैं।
किन्नर भी उसी ईश्वर की रचना हैं, जिसने हम सबको बनाया है। फर्क सिर्फ इतना है कि प्रकृति ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। लेकिन दिल, भावनाएँ, सपने और सम्मान की चाहत—यह सब उनमें भी उतना ही है जितना किसी और इंसान में होता है।
इन्हीं भावनाओं को समझने के लिए बड़ौत में किन्नर समाज के गुरु राजवीर पांचाल और मुख्य किन्नर चांदनी किन्नर से पत्रकार सुरेंद्र मलानिया ने एक भावनात्मक बातचीत की। इस बातचीत में किन्नर समाज के दर्द, संघर्ष और समाज से उनकी उम्मीदों की सच्ची तस्वीर सामने आई।
बातचीत के दौरान गुरु राजवीर पांचाल ने गहरी सांस लेते हुए कहा कि किन्नर समाज का जीवन बाहर से जितना रंगीन दिखाई देता है, अंदर से उतना ही संघर्ष भरा होता है।
उन्होंने कहा,
“हम भी इंसान हैं, लेकिन कई बार समाज हमें इंसान मानने में भी हिचकिचाता है। कुछ लोग हमें सम्मान देते हैं, लेकिन कुछ लोग आज भी हमें मजाक समझते हैं। हमें सबसे ज्यादा दुख तब होता है जब लोग हमें देखकर हंसते हैं या अपमानजनक शब्द बोलते हैं।”
राजवीर पांचाल ने बताया कि किन्नरों का सबसे बड़ा दर्द यह होता है कि कई बार उनका अपना परिवार ही उन्हें स्वीकार नहीं कर पाता। बचपन में ही अलगाव का दर्द उनके जीवन का हिस्सा बन जाता है। ऐसे में किन्नर समाज ही उनका परिवार बन जाता है, जहां सभी एक-दूसरे का सहारा बनकर जीवन की राह तय करते हैं।
मुख्य किन्नर चांदनी किन्नर ने अपने जीवन की कहानी साझा करते हुए कहा कि किन्नरों का जीवन संघर्ष और आत्मसम्मान की कहानी है।
उन्होंने भावुक होकर कहा,
“लोग हमें तालियां बजाते और नाचते हुए देखते हैं, लेकिन कोई यह नहीं देखता कि हमारे दिल में भी कितने दर्द छिपे होते हैं। हमें भी प्यार चाहिए, अपनापन चाहिए, सम्मान चाहिए।”
चांदनी किन्नर ने बताया कि जब किसी घर में बच्चे का जन्म होता है या शादी जैसे शुभ अवसर आते हैं, तो किन्नर वहां पहुंचकर गीत गाते हैं, नाचते हैं और दिल से आशीर्वाद देते हैं।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,
“हम जब दुआ देते हैं तो दिल से देते हैं। हम चाहते हैं कि हर घर में खुशियां रहें, किसी के जीवन में दुख न आए। शायद इसलिए लोग मानते हैं कि किन्नरों की दुआ में असर होता है।”
गुरु राजवीर पांचाल का मानना है कि समय धीरे-धीरे बदल रहा है और अब समाज में किन्नर समुदाय के प्रति सोच में भी परिवर्तन आ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर किन्नर समाज को शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलें, तो वे भी समाज के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकते हैं।
उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा,
“हमें दया नहीं चाहिए, हमें सम्मान चाहिए। हमें भी इंसान समझिए, हमें भी बराबरी का अधिकार दीजिए।”
बड़ौत के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए चांदनी किन्नर ने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों ने उन्हें काफी सम्मान और अपनापन दिया है। उन्होंने सभी लोगों के लिए दिल से दुआ करते हुए कहा—
“भगवान सबके घर खुशियां दें, हर परिवार में प्रेम बना रहे और किसी की आंखों में आंसू न आए।”
इस अवसर पर पत्रकार सुरेंद्र मलानिया ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मुलाकात केवल एक साक्षात्कार नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव रही। उन्होंने कहा कि अक्सर समाज किन्नरों को केवल तालियों और नेग तक सीमित समझ लेता है, जबकि उनके दिल में भी वही संवेदनाएं हैं जो किसी भी इंसान के दिल में होती हैं।
सुरेंद्र मलानिया ने कहा कि किन्नर समाज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अपने दर्द को छिपाकर भी दूसरों के लिए दुआ करते हैं। जब वे किसी के घर खुशियों के अवसर पर जाते हैं, तो उनकी दुआ सच्चे दिल से निकलती है।
उन्होंने कहा कि समाज को अब अपने नजरिये में बदलाव लाना होगा। किन्नर समुदाय को दया का नहीं, बल्कि सम्मान का अधिकार मिलना चाहिए। जब समाज उन्हें अपनापन देगा, तभी वे पूरी तरह मुख्यधारा से जुड़ पाएंगे।
यह बातचीत हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जिन लोगों को हम अक्सर दूरी या मजाक की नजर से देखते हैं, वे भी उसी समाज का हिस्सा हैं जिसमें हम रहते हैं। उनके दिल में भी वही इच्छाएं हैं—सम्मान की, अपनापन की और बराबरी की।
शायद इंसानियत की असली पहचान यही है कि हम हर व्यक्ति को उसकी पहचान के साथ स्वीकार करें। क्योंकि जब समाज किसी को अपनाता है, तभी वह व्यक्ति सच में मुस्कुरा पाता है।
और किन्नर समाज आज भी यही चाहता है—
थोड़ा सा सम्मान, थोड़ा सा अपनापन… और सबके लिए दिल से निकली दुआ।
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