असम

असम में दो दिनों में 1,100 से अधिक परिवारों की बेदखली

लुटुमारी लोंगजाप में 500–600 घर ढहा दिए गए।

 नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

असम के नगांव , होजाई और गोलाघाट जिलों में राज्य प्रशासन ने रविवार और शनिवार को चलाए गए विध्वंस अभियान में कुल 1,100 से अधिक परिवारों को जंगल भूमि से बेदखल कर दिया है। अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन परिवारों में बहुल्य रूप से बंगाली भाषी मुस्लिम लोग हैं। रविवार, 18 अक्टूबर को नगांव के लुटुमारी लोंगजाप रिज़र्व फ़ॉरेस्ट में लगभग 500–600 परिवारों के मकान ध्वस्त किए गए। कई निवासी खुद अपने सामान निकाल कर चले गए; किसी प्रकार की हिंसा की सूचना नहीं मिली। शनिवार को तीनों जिलों में कुल 547 परिवारों को हटाया गया — नगांव में 336, होजाई में 152 और गोलाघाट में 59 परिवार। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह कार्रवाई जारी रह सकती है। लुटुमारी के निवासी राज्य के दावे का विरोध कर रहे हैं कि वे वन भूमि पर अवैध रूप से कब्ज़ा किए हुए थे। उनका कहना है कि उनके बुजुर्ग पहले वन विभाग में मज़दूर थे और उन्हें औपनिवेशिक काल में लागू ताऊन्या (taungya) प्रणाली के तहत बसा दिया गया था। इसमें प्रभावित परिवारों ने बेदखली के खिलाफ गुवाहाटी उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। जून में न्यायालय ने निर्देश दिया था कि वे 30 दिनों के भीतर भूमि खाली करें और आदेश दिया था कि समयसीमा के बाद बिजली कनेक्शन काट दिए जाएँ। न्यायालय ने सार्वजनिक हित में जंगलों की सुरक्षा को निजी निवास के दावों पर प्राथमिकता दी थी। यह नवीनतम कार्रवाई पिछले साल नवंबर में हुए बड़े अभियान के बाद आई है, जिसमें लुटुमारी क्षेत्र में लगभग 1,700 परिवार प्रभावित हुए थे। होजाई में जमुना-मौदांगा रिज़र्व फ़ॉरेस्ट से 152 परिवार हटाए गए हैं, जबकि गोलाघाट के नं. 2 नेघेरिबिल से 59 परिवारों को अदालत के राज्य सरकार के पक्ष में निर्णय के बाद हटाया गया। असम सरकार का कहना है कि ये अभियान सरकारी और वन भूमि को अवैध अतिक्रमणकर्ताओं से मुक्त कराने के उद्देश्य से चलाए जा रहे हैं। सरकारी स्रोतों से संकलित आँकड़ों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में लगभग 19,000 परिवारों को असम में सरकारी भूमियों से हटाया गया है; इनमें अधिकांश मुस्लिम समुदाय के हैं। स्थिति फिलहाल तनावमुक्त बनी रही, जबकि प्रभावित परिवारों और अधिकारिक अधिकारियों के बीच वाद-विवाद और कानूनी प्रक्रियाएँ जारी हैं।

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