अतिक्रमण हटाने पहुंची राजस्व टीम, कार्रवाई अधूरी; संसाधनों और नोटिस पर अलग-अलग दावे
मर्री में रोजगार सहायक पर शासकीय भूमि पर मकान बनाने का आरोप; 14 अक्टूबर को गठित हुआ था दल, अब कार्रवाई में देरी पर जवाबदेही के सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लांजी। जनपद पंचायत किरनापुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत मर्री में शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण कर मकान निर्माण किए जाने का मामला प्रशासनिक कार्रवाई में देरी को लेकर चर्चा में है। शिकायत के बाद राजस्व विभाग ने 14 अक्टूबर 2026 को अतिक्रमण हटाने के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों का दल गठित किया था। हालांकि, संबंधित भूमि से अतिक्रमण हटाए जाने की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। राजस्व विभाग ने इसके पीछे आवश्यक संसाधनों की कमी बताई है, जबकि ग्राम पंचायत ने संसाधन उपलब्ध कराने के संबंध में नोटिस मिलने से इनकार किया है। दोनों पक्षों के अलग-अलग बयानों के बीच अब कार्रवाई नहीं हो पाने के कारणों को स्पष्ट करने की आवश्यकता है।
शिकायत पर गठित किया गया था राजस्व दल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत मर्री में पदस्थ रोजगार सहायक पर शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर मकान निर्माण करने का आरोप लगाते हुए शिकायत की गई थी। इसके बाद राजस्व विभाग ने संबंधित भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की। उपलब्ध आदेश की प्रति के अनुसार, 14 अक्टूबर को तहसीलदार किरनापुर, राजस्व निरीक्षक और संबंधित पटवारियों सहित राजस्व अमले को मौके पर उपस्थित होकर कार्रवाई करने तथा संयुक्त प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
हालांकि, निर्धारित कार्रवाई पूरी नहीं होने से यह सवाल खड़ा हो गया है कि प्रशासनिक आदेश के बावजूद अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया जा सका। फिलहाल, संबंधित भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति और कार्रवाई नहीं होने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
संसाधनों की कमी का हवाला, पंचायत ने नोटिस से किया इनकार
इस संबंध में नायब तहसीलदार पी.एल. टेकाम ने बताया कि राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण कार्रवाई नहीं हो सकी। उनके अनुसार, संसाधन उपलब्ध कराने के लिए संबंधित ग्रामीण निकाय को नोटिस जारी किया गया था।
दूसरी ओर, ग्राम पंचायत मर्री की ओर से ऐसा कोई नोटिस प्राप्त होने से इनकार किया गया है। इस विरोधाभास के बाद नोटिस जारी करने की तारीख, उसे भेजने के माध्यम और उसकी प्राप्ति से संबंधित अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगा कि नोटिस जारी किया गया था या नहीं और संसाधनों की व्यवस्था में बाधा कहां आई।
आदेश के बाद भी कार्रवाई अधूरी, प्रशासनिक समन्वय पर सवाल
अतिक्रमण हटाने के लिए जब अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए आदेश जारी किया गया था, तो आवश्यक संसाधनों और संबंधित विभागों के बीच समन्वय की व्यवस्था भी समय रहते सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। यदि संसाधनों की कमी के कारण कार्रवाई रोकनी पड़ी, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कमी दूर करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और अगली कार्रवाई कब प्रस्तावित है।
शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत केवल आरोप तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। राजस्व विभाग को स्थल निरीक्षण, भूमि के अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, संबंधित व्यक्ति को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना आवश्यक है।
अब एसडीएम की अगली कार्रवाई पर निगाहें
मामले में अब किरनापुर एसडीएम कमलचंद सिंहसार की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रशासन के सामने चुनौती केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई दोबारा कराने की नहीं, बल्कि पिछली कार्रवाई अधूरी रहने के कारणों को स्पष्ट करने की भी है। राजस्व विभाग और ग्राम पंचायत के बयानों में सामने आए अंतर की जांच कर यह तय किया जाना चाहिए कि संसाधनों की व्यवस्था और सूचना के आदान-प्रदान में कहां कमी रही।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का आरोप और कार्रवाई अधूरी रहने की स्थिति सामने आई है। अतिक्रमण की पुष्टि, नोटिस की वास्तविक स्थिति तथा जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक अभिलेखों और संबंधित पक्षों के तथ्यों का परीक्षण जरूरी है। अब देखना होगा कि प्रशासन मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है और शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया कब पूरी होती है।



