
नई दिल्ली : आॅल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के 10,000 रुपये के पीस बॉन्ड नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने याचिका में दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा और तत्काल सुनवाई की मांग की है। 16 अक्टूबर को ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था।
आॅल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस के एक नोटिस को चुनौती देने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। इस नोटिस में उनसे कहा गया है कि वे एक चल रही जांच के दौरान शांति बनाए रखने की गारंटी के तौर पर, एक जमानतदार के साथ 10,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड जमा करें। उनकी कानूनी टीम ने पुष्टि की है कि एक याचिका दायर की गई है और कोर्ट की वेकेशन बेंच के समक्ष इसकी तत्काल सुनवाई की मांग की गई है।
यह कदम 16 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस द्वारा नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद उठाया गया है। यह घटना कनॉट प्लेस (राजीव चौक) में आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हुई थी। पुलिस के अनुसार, 16 अक्टूबर की शाम को जब बोरा मार्च में शामिल होने जा रही थीं, तब उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। अगले दिन दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
यह मार्च चुनाव आयोग की ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (रकफ) प्रक्रिया से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच निकाला गया, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जवाबदेही की भी मांग की। विरोध प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही कई लोगों को हिरासत में ले लिया गया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दिपके को भी मार्च से पहले हिरासत में ले लिया गया था। उन्हें एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने और शांति बनाए रखने का मुचलका (पीस बॉन्ड) देने के बाद रिहा कर दिया गया।
दिल्ली पुलिस के बयानों के अनुसार, 16 अक्टूबर की शाम को बोरा और दिपके, दोनों को विरोध-प्रदर्शन से जुड़े एहतियाती प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया था। इसके बाद, दिपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (इठरर) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई।



