बाराबंकी
समाजसेवी ने पेश की हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बाराबंकी के कस्बा रसौली में दिखी हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल भारतीय संस्कृति में आस्था, परंपरा और सामाजिक सौहार्द का जब अद्भुत मेल होता है, तो वह समाज के लिए एक नई दिशा तय करता है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक और अनुकरणीय उदाहरण हाल ही में देखने को मिला, जब विजयदशमी व मूर्ति विसर्जन के पावन पर्व पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।यह विराट आयोजन समाजसेवी प्रधान पद प्रत्याशी सरताज आलम उर्फ कल्लू के नेतृत्व में संपन्न हुआ, जिसने न केवल धार्मिक अनुष्ठान को भव्यता दी, हिन्दू मुस्लिम एकता का एक नया पैगाम भी दिया।आज के समय में जब लोग धार्मिक आयोजनों को केवल दिखावे या व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का साधन बनाते जा रहे हैं, तब सरताज आलम उर्फ कल्लू द्वारा किया गया यह आयोजन पूरे हिन्दुस्तान और समाज के लिए कई गहरी सीख छोड़ जाता है रसौली की महारानी का विसर्जन शोभायात्रा में जैसे पवित्र कार्य के साथ जन-सेवा (भंडारे) को जोड़कर यह साबित कर दिया गया है कि धर्म का वास्तविक मार्ग अहंकार का त्याग कर समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना है।आधुनिकता की दौड़ में अपनी रसौली की महारानी और संस्कृति को भूलते जा रहे युवाओं के लिए यह आयोजन अपनी माटी और परंपराओं से जुड़े रहने का एक सशक्त संदेश है।भंडारा एक ऐसा माध्यम है जहाँ अमीर-गरीब, ऊँच-नीच का भेद मिट जाता है। इस आयोजन ने यह दर्शाया कि सच्चा उत्सव वही है, जिसमें समाज का हर व्यक्ति समान भाव से प्रसाद ग्रहण करे।जब इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन जनहित और सामाजिक सरोकार से जुड़ते हैं, तो देश की एकता और अखंडता को स्वतः मजबूती मिलती है। यही एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत की असली नींव है।धर्म केवल दीवारों के भीतर पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि जब वह जन-कल्याण और सेवा का रूप ले लेता है, तभी वह राष्ट्र निर्माण में अपनी असली भूमिका निभाता है।”



