बिना सहमति राशन वितरण केंद्र बदले जाने से लाभार्थी परेशान, प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी से लगाई गुहार
Beneficiaries distressed over the change of ration distribution center without their consent; appeal to the Block Supply Officer for assistance.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। जिले के पाकुड़ प्रखण्ड के ग्राम आटोगली, पंचायत चेंगाडांगा के राशन कार्डधारियों ने बिना पूर्व अनुमति एवं सहमति के राशन वितरण व्यवस्था बदले जाने पर नाराजगी जताई है। लाभार्थियों के अनुसार, पहले उन्हें जोबा स्वयं सहायता समूह (SHG), चेंगाडांगा के माध्यम से नियमित राशन मिलता था, लेकिन अब वितरण व्यवस्था को हासिदा SHG, पाथरघाटा और आसिपाना SHG, नवादा ( पंचायत) में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस बदलाव के कारण लाभार्थियों को राशन लेने के लिए अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे समय, श्रम और अतिरिक्त खर्च बढ़ने के साथ बुजुर्गों, महिलाओं एवं जरूरतमंद लोगों को विशेष परेशानी हो रही है। इस संबंध में लाभार्थियों ने प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी, पाकुड़ को आवेदन देकर मामले की जांच कराने और पूर्व की तरह जोबा SHG, चेंगाडांगा के माध्यम से राशन वितरण बहाल करने की मांग की है। आवेदन में लगभग एक दर्जन लाभार्थियों ने जनहित को ध्यान में रखते हुए जल्द उचित कार्रवाई करने की अपील की है। समाचार लिखे जाने तक आवेदकों ने बताया कि आवेदन की रिसीविंग नहीं दिया गया है। वही प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी ने दूरभाष पर बातचीत में बताया कि स्थिति देखकर लाभार्थियों की बेहतरी में जो भी उचित होगा, उनकी हित में आवश्यक कार्रवाई करते हुए समाधान किया जायेगा।
राशन कार्ड स्थानांतरण में OTP प्रक्रिया पर उठे सवाल, लाभार्थियों की सहमति को लेकर चिंता
पाकुड़ प्रखंड के आटोगली गांव में राशन वितरण व्यवस्था बदले जाने के मामले में अब ऑनलाइन कार्ड स्थानांतरण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। वर्तमान व्यवस्था में राशन कार्ड को दूसरे डीलर से जोड़ने के लिए ऑनलाइन आवेदन और OTP की आवश्यकता होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि OTP लेते समय क्या संबंधित कार्डधारकों को स्थानांतरण के उद्देश्य की स्पष्ट जानकारी दी गई थी और उनकी सहमति ली गई थी? ग्रामीणों का कहना है कि आम लाभार्थियों को तकनीकी प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं होती। ऐसे में यह जांच का विषय है कि OTP लेते समय कार्डधारकों को बताया गया था या नहीं कि उनका राशन कार्ड दूसरे डीलर से जोड़ा जा रहा है और इसके बाद उन्हें दूसरे स्थान से राशन लेना पड़ेगा। इस मामले में संबंधित कार्यालय के ऑपरेटर और प्रक्रिया में शामिल कर्मियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि राशन कार्डों का स्थानांतरण नियमानुसार और लाभार्थियों की जानकारी एवं सहमति से किया गया था या नहीं। हालांकि, इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।



