गाजियाबाद

अंकुर विहार में अवैध निर्माण कार्य पर उठे सवाल

आठ माह से शिकायतें, नोटिस और कार्य रोक आदेश के बावजूद जारी है निर्माण

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और पुलिस की आंख-मिचौली पर , स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
लोनी, गाजियाबाद। अंकुर विहार क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण को लेकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि डीएलएफ अंकुर विहार स्थित भूखंड संख्या बी-13/4 डी एल एफ अंकुर बिहार पर नियमों को दरकिनार कर बहुमंजिला फ्लैट निर्माण का कार्य पिछले कई महीनों से जारी है, जबकि इसकी शिकायत स्थानीय  नागरिकों द्वारा पिछले आठ माह  से लगातार की जा रही है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, भवन की पहली मंजिल बनने के बाद से ही गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को अवैध निर्माण की शिकायतें भेजी जाने लगी थीं। बावजूद इसके निर्माण कार्य पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी और आज भी भवन निर्माण कार्य जारी है।
इसी मामले को लेकर वार्ड-33 के सभासद रामनिवास त्रिपाठी ने भी आईजीआरएस शिकायत संख्या 30102826000428 दिनांक 02 जून 2026 के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत की जांच जीडीए के प्रवर्तन जोन-8 के अवर अभियंता अखिल मिश्रा द्वारा की गई।
जीडीए की जांच में सामने आया मानचित्र से विचलन
अवर अभियंता अखिल मिश्रा ने प्रभारी अधिकारी सम्पूर्ण समाधान दिवस को भेजे अपने पत्र संख्या 923/26 में बताया कि भूखंड संख्या बी-13/4, डीएलएफ अंकुर विहार, लोनी, गाजियाबाद का मानचित्र स्वीकृत है, लेकिन निर्माण कार्य स्वीकृत मानचित्र से विचलन कर किया जा रहा है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए वाद संख्या जीडीए/जोन-8/एएनआई/2026/0005360 दिनांक 04 मई 2026 दर्ज किया। इसके साथ ही निर्माणकर्ता को कारण बताओ नोटिस, कार्य रोकने का आदेश तथा निर्माण रुकवाने के लिए पुलिस को भी पत्र जारी किया गया।
आदेशों के बावजूद नहीं रुका अवैध निर्माण कार्य
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जीडीए द्वारा नोटिस जारी करने और पुलिस को पत्र लिखने के बावजूद निर्माण कार्य लगातार जारी है। इससे प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई की गई होती तो अवैध निर्माण को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता था। उनका आरोप है कि कागजी कार्रवाई तो हुई, लेकिन जमीनी स्तर पर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और पुलिस द्वारा कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
हाईटेंशन लाइन के नजदीक निर्माण से खतरा
मामले का एक गंभीर पहलू यह भी है कि निर्माणाधीन भवन के बेहद निकट से 30 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन गुजर रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर किए जा रहे निर्माण से किसी भी समय बड़ा हादसा घटित हो सकता है। क्षेत्र में पहले भी हाईटेंशन लाइनों की चपेट में आने से कई लोगों की जान जा चुकी है, जिससे लोगों में भय का माहौल है।
जीडीए और पुलिस की भूमिका पर उठ रहे हैं सवाल
लगातार शिकायतों, जांच रिपोर्ट, नोटिस और कार्य रोक आदेश के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने से स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि आखिर ऐसी कौन सी वजह है जिसके चलते अवैध निर्माण पर रोक नहीं लग पा रही है। लोगों का कहना है कि यदि किसी निर्माण को अवैध या मानचित्र के विपरीत माना गया है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि कार्रवाई के बावजूद निर्माण कैसे जारी रहा। साथ ही अवैध निर्माण कराने वालों के साथ-साथ यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाए।
जनप्रतिनिधियों की मांग
सभासद रामनिवास त्रिपाठी ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण स्थल का पुनः निरीक्षण कराया जाए, निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए, सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विद्युत लाइन के निकट किए गए निर्माण की जांच हो तथा दोषी निर्माणकर्ताओं और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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