
नई दिल्ली : अमेरिका के ताजा हवाई हमलों में ईरान के रणनीतिक चाबहार बंदरगाह को नुकसान पहुंचने की खबर है। हमले में निगरानी टावर ढहने का दावा किया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने इसकी तस्वीर साझा की, जबकि ईरानी मीडिया ने बंदरगाह पर तीसरे हमले की पुष्टि तो की, लेकिन टावर गिरने पर आधिकारिक बयान नहीं दिया।
शुक्रवार को अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों में ओमान की खाड़ी पर स्थित ईरान के रणनीतिक चाबहार बंदरगाह को नुकसान पहुंचने की खबर है। शुरूआती जानकारी के अनुसार, हमले में बंदरगाह का एक निगरानी टावर (सर्विलांस टावर) ढह गया। चाबहार बंदरगाह अफगानिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग माना जाता है और क्षेत्रीय रणनीति के लिहाज से इसकी अहम भूमिका है।
क्या अमेरिकी रक्षा मंत्री ने टावर गिरने की तस्वीर साझा की?
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें चाबहार बंदरगाह का निगरानी टावर ढहता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, यह तस्वीर उनके साझा करने से पहले ही सोशल मीडिया पर कई एक्टिविस्ट्स के जरिए वायरल हो चुकी थी।
क्या चाबहार पहले भी हमलों का निशाना बन चुका है?
चाबहार बंदरगाह पहले भी कई बार अमेरिकी हवाई हमलों के निशाने पर रहा है। इस बार हुए हमले के बाद ईरान के सरकारी मीडिया ने बंदरगाह पर तीसरे दौर की एयरस्ट्राइक की पुष्टि की, लेकिन निगरानी टावर के ढहने को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की।
क्यों इतना अहम है यह रणनीतिक बंदरगाह?
ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी पर स्थित चाबहार (उँुंंँं१) बंदरगाह पश्चिम एशिया के सबसे रणनीतिक बंदरगाहों में गिना जाता है। यह बंदरगाह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है, इसलिए तनाव या युद्ध की स्थिति में भी इसकी उपयोगिता बनी रहती है।
भारत के लिए भी बेहद अहम है चाबहार
चाबहार के जरिए भारत बिना पाकिस्तान की सीमा से गुजरे सीधे अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक सामान पहुंचा सकता है। यही वजह है कि भारत ने इसके विकास में बड़ा निवेश किया है। यह बंदरगाह ईरान के लिए व्यापार, ऊर्जा निर्यात और क्षेत्रीय संपर्क का महत्वपूर्ण केंद्र है। अफगानिस्तान के लिए यह समुद्री व्यापार का प्रमुख विकल्प है, जबकि उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजाकिस्तान और ताजिकिस्तान जैसे भू-आवेष्ठित देशों के लिए भी यह अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच का अहम मार्ग बन सकता है। इसके अलावा रूस के साथ अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (कठरळउ) को मजबूत करने में भी चाबहार की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। इसलिए यह बंदरगाह भारत, ईरान, अफगानिस्तान, मध्य एशियाई देशों और रूस सभी के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
चाबहार को विकसित कर रहा है भारत
चाबहार बंदरगाह का विकास भारत और ईरान मिलकर कर रहे हैं। भारत इस परियोजना में निवेश, उपकरण और संचालन संबंधी सहायता दे रहा है, जबकि बंदरगाह ईरान की भूमि पर स्थित है और उसका स्वामित्व ईरान के पास ही है। 2024 में भारत और ईरान ने चाबहार के शहीद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास और संचालन के लिए 10 वर्ष का दीर्घकालिक समझौता भी किया। हालांकि, अफगानिस्तान भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण साझेदार है। वर्ष 2016 में भारत, ईरान और अफगानिस्तान ने चाबहार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य इस बंदरगाह के माध्यम से अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक संपर्क बढ़ाना था। हालांकि, बंदरगाह के निर्माण और संचालन का मुख्य काम भारत और ईरान ही कर रहे हैं।



