
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में विमर्श 2026 में कहा कि डीआरडीओ और इंडस्ट्री की मजबूत साझेदारी भारत को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बना सकती है। उन्होंने बताया कि रक्षा R&D बजट का 25 प्रतिशत निजी क्षेत्र को देकर आयात पर निर्भरता कम की जा रही है ताकि देश पूरी तरह आत्मनिर्भर बने।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आॅर्गनाइजेशन और इंडस्ट्री के बीच साझेदारी में भारत को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने की क्षमता है। नई दिल्ली में इंडस्ट्री सिनर्जी मीट, विमर्श 2026 में बोलते हुए, सिंह ने जोर दिया कि डिफेंस सेक्टर में रिसर्च और डेवलपमेंट का काम सिर्फ़ सरकार या डीआरडीओ अकेले नहीं कर सकते, बल्कि इसके लिए मिलकर काम करने की जरूरत है।
राजनाथ ने कहा कि डिफेंस सेक्टर में रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए डीआरडीओ आज सबसे बड़ी संस्था है। लेकिन यह भी सच है कि डिफेंस सेक्टर में रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए सिर्फ़ सरकार या डीआरडीओ की कोशिशें काफी नहीं हैं। यह मिलकर की जाने वाली कोशिश है। और यही सहयोग इस विमर्श 2026 का मुख्य संदेश है। डीआरडीओ और इंडस्ट्री के बीच साझेदारी ही भारत को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बना सकती है।
सिंह ने रक्षा क्षेत्र में हाल ही में हुए सुधारों, जैसे कि ‘पॉजिटिव इंडिजनाइजेशन लिस्ट’ (स्वदेशीकरण की सूची), ‘मेक इन इंडिया’ पहल और रक्षा R&D बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा निजी क्षेत्र को देने जैसे कदमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन कदमों का मकसद रक्षा आयात पर निर्भरता कम करना और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने आत्मनिर्भरता के विचार को विस्तार से समझाते हुए कहा कि जब मैं आत्मनिर्भरता की बात करता हूँ, तो इसका मतलब सिर्फ़ यह नहीं है कि हम यहाँ कुछ पुर्ज़े, कुछ मिसाइलें, कुछ हथियार और प्लेटफॉर्म बना रहे हैं। आत्मनिर्भरता हमारे चरित्र का हिस्सा होनी चाहिए। यह हमारे नजरिए का हिस्सा होनी चाहिए। जिस देश के पास अपनी तकनीक होती है, उसके पास अपना भविष्य तय करने की ताकत भी होती है। इसलिए, हमारी आत्मा, हमारे मन, हमारे विचारों और हमारी चेतना में आत्मनिर्भरता की भावना होनी चाहिए।
रक्षा मंत्री ने इस साझेदारी में शामिल एक-दूसरे की पूरक ताकतों के बारे में बताया डीआरडीओ के पास ज्ञान और तकनीक है, इंडस्ट्रीज मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता देती हैं, स्टार्ट-अप्स इनोवेशन और तेजी लाते हैं, और युवाओं के पास नए भारत का विजन है। उन्होंने भरोसा जताया कि ‘विमर्श 2026’ की चचार्ओं के नतीजे लैबोरेटरी, इंडस्ट्रीज, स्टार्ट-अप्स और यूनिवर्सिटीज तक पहुँचेंगे, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक मजबूती बढ़ेगी। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि ‘विमर्श 2026’ से निकली चचार्एँ लैबोरेटरी, इंडस्ट्रीज, स्टार्ट-अप्स और यूनिवर्सिटीज तक पहुँचेंगी; और आखिर में, ये देश की सीमाओं की सुरक्षा और भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती में साफ तौर पर दिखेंगी। हमारी चचार्एँ सिर्फ़ विकास की बातें न करें; बल्कि विकास का रास्ता भी बनाएँ। और यही ‘विमर्श 2026’ की सबसे बड़ी कामयाबी होगी।



