गाजियाबाद

उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव पर संशय, सुप्रीम कोर्ट जा सकती है यूपी सरकार

ओबीसी आरक्षण सर्वे में देरी और प्रशासनिक व्यस्तता बनी चुनौती, चुनाव समय पर कराने को लेकर सरकार में मंथन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी  : उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर हाईकोर्ट के निर्णय के बाद सरकार के स्तर पर मंथन शुरू हो गया है।  सूत्रों का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख करने पर भी विचार कर सकती है। जातीय जनगणना, विधानसभा चुनाव की तैयारियों और विभिन्न परीक्षाओं के बीच पंचायत चुनाव समय पर कराना उत्तर प्रदेश सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रशासनिक मशीनरी की व्यस्तता और पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया अधूरी होने के कारण पंचायत चुनाव की समय-सारिणी को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में अपील करने को लेकर अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही लिया जाएगा।
33 जिलों में  अभी भी ओबीसी सर्वे बाकी
पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का आरक्षण निर्धारित करने के लिए गठित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल 20 नवंबर को पूरा होना है। सूत्रों से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आयोग अब तक 42 जिलों का ही दौरा कर सका है, जबकि 33 जिलों में ओबीसी आरक्षण से संबंधित सर्वे का काम बाकी है। ऐसे में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करना भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
जनगणना और विधानसभा चुनाव भी चुनौती
प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच जनगणना का दूसरा चरण दिसंबर 2026 से जनवरी 2027 तक प्रस्तावित है। वहीं, जनवरी में विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना भी जताई जा रही है। इन गतिविधियों के चलते प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यस्तता बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, राज्य निर्वाचन आयोग 10 जून को मतदाता सूची जारी कर चुका है। इसके बावजूद ओबीसी आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक तैयारियों को देखते हुए पंचायत चुनाव समय पर संपन्न कराने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम और न्यायालय के आदेश पर होने वाले निर्णय पर टिकी है
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