बागपत

आंखों की सेहत से कोई समझौता नहीं, डॉ. शश्या तोमर ने बताया समय पर जांच का महत्व

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत। आंखें केवल दुनिया को देखने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन की खूबसूरती को महसूस करने का जरिया भी हैं। आंखों की रोशनी कमजोर होने पर व्यक्ति की दिनचर्या प्रभावित होती है और कई बार उसका आत्मविश्वास भी कम होने लगता है। ऐसे में मरीज की आंखों की रोशनी बेहतर करने और उसके चेहरे पर मुस्कान लौटाने का काम किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। इसी भावना के साथ डॉ. शश्या तोमर नेत्र रोग विशेषज्ञ के रूप में मरीजों को सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
डॉ. शश्या तोमर (MBBS, MS) का मानना है कि डॉक्टर का काम केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि मरीज को मानसिक संबल देना और उसके मन में स्वस्थ होने का विश्वास जगाना भी है। मरीज की संतुष्टि और उसके चेहरे पर लौटने वाली मुस्कान उनके लिए महत्वपूर्ण है।
मेहनत और सेवा भावना से चुना चिकित्सा का क्षेत्र
डॉ. शश्या तोमर ने चिकित्सा शिक्षा हासिल करने के लिए कठिन परिश्रम किया। एमबीबीएस और एमएस जैसी शिक्षा के माध्यम से उन्होंने नेत्र रोगों के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त की। उनके लिए डॉक्टर बनना केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज की सेवा करने का अवसर है। उनका मानना है कि एक अच्छे चिकित्सक के लिए ज्ञान और अनुभव के साथ धैर्य, संवेदनशीलता और मरीजों के प्रति अपनापन भी जरूरी है।
नेत्र रोगों के प्रति जागरूकता जरूरी
आंखों की रोशनी कम होना, मोतियाबिंद और अन्य दृष्टि संबंधी समस्याएं व्यक्ति की दिनचर्या को प्रभावित कर सकती हैं। समय पर जांच और उचित उपचार से कई समस्याओं का प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है। डॉ. शश्या तोमर के अनुसार, आंखों में लगातार दर्द, लालिमा, धुंधलापन या दृष्टि में अचानक बदलाव होने पर नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। नियमित जांच से आंखों से संबंधित समस्याओं की समय रहते पहचान करने में मदद मिलती है।
मरीज की खुशी ही सबसे बड़ा पुरस्कार
डॉ. शश्या तोमर के लिए चिकित्सा सेवा का सबसे संतोषजनक पहलू वह है, जब उपचार के बाद मरीज को राहत मिलती है। किसी मरीज को दोबारा बेहतर दिखाई देना और अपने परिवार के सदस्यों को देखकर खुशी महसूस करना डॉक्टर के लिए भी भावनात्मक अनुभव होता है। उनका मानना है कि मरीज को सही जानकारी देना, उसकी परेशानी ध्यान से सुनना और उपचार के दौरान उसका विश्वास बनाए रखना चिकित्सा सेवा के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
मौसम बदलने पर सर्दी का आंखों पर क्या पड़ता है असर?
मौसम में बदलाव के साथ सर्दी-जुकाम, एलर्जी और आंखों से जुड़ी परेशानियां भी सामने आ सकती हैं। ठंडी हवा, धूल-मिट्टी और वातावरण में नमी की कमी के कारण कुछ लोगों को आंखों में जलन, खुजली, लालिमा, किरकिरापन और पानी आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सर्दी-जुकाम के साथ होने वाले कुछ वायरल संक्रमण भी आंखों को प्रभावित कर सकते हैं।
मौसम बदलने पर आंखों से लगातार पानी आना, पलकों में खुजली होना या आंखें लाल होना एलर्जी अथवा संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं। ठंडी हवा और कम नमी के कारण आंखों की सतह में सूखापन भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में आंखों को बार-बार रगड़ने से बचना चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के आई ड्रॉप, विशेषकर स्टेरॉयड वाली दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
बच्चों और बुजुर्गों की आंखों का रखें ध्यान
बच्चों में आंखों को बार-बार रगड़ने, लालिमा या पानी आने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो ध्यान देना जरूरी है। बुजुर्गों को भी दृष्टि में बदलाव या आंखों में लगातार परेशानी होने पर जांच करानी चाहिए। आंखों से चिपचिपा स्राव निकलने या संक्रमण की आशंका होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है। हाथों की स्वच्छता बनाए रखें और तौलिया या रूमाल साझा करने से बचें।
आंखों को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये उपाय
आंखों की देखभाल के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनाई जा सकती हैं। ठंडी हवा और धूल-मिट्टी से आंखों को बचाएं तथा उन्हें बार-बार हाथों से न रगड़ें। पर्याप्त पानी पिएं और मोबाइल, लैपटॉप या टीवी का उपयोग करते समय बीच-बीच में आंखों को आराम दें। आंखों में परेशानी होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के आई ड्रॉप न डालें और नियमित रूप से आंखों की जांच कराएं।
यदि आंखों में तेज दर्द हो, रोशनी कम होने लगे, प्रकाश सहन न हो या अचानक धुंधला दिखाई देने लगे, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। ऐसे लक्षणों को सामान्य सर्दी या एलर्जी का असर मानकर टालना उचित नहीं है।
मोबाइल और लैपटॉप के इस्तेमाल में बरतें सावधानी
आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में थकान, सूखापन और असहजता महसूस हो सकती है। स्क्रीन का उपयोग करते समय नियमित अंतराल पर नजर हटाकर दूर देखना, पलकें झपकाते रहना और पर्याप्त रोशनी में पढ़ना उपयोगी आदतें हैं। बच्चों को खेलकूद और बाहरी गतिविधियों के लिए भी समय देना चाहिए।
समय पर जांच से आंखों की सुरक्षा
डॉ. शश्या तोमर का मानना है कि चिकित्सा केवल बीमारी का उपचार करने तक सीमित नहीं है। मरीज की परेशानी समझना, उसे भरोसा देना और बेहतर जीवन की ओर लौटने में सहायता करना भी डॉक्टर की जिम्मेदारी है। आंखों की सेहत के प्रति जागरूकता और समय पर जांच दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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