ललितपुर
गांधी नगर नई बस्ती में सरकारी आर.ओ. बना शोपीस, निजी मंदिर परिसर में बंद पड़ा
पार्षद पुष्पा अरविंद राजा के वार्ड में जनता को नहीं मिल रहा शुद्ध पेयजल

मोहल्लेवासियों की मांग, आर.ओ. को सार्वजनिक स्थान पर शिफ्ट कर जल्द कराया जाए चालू
लापरवाही से खराब होने की कगार पर मशीन, जिम्मेदारों की चुप्पी से बढ़ा आक्रोश
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
ललितपुर। शहर के गांधीनगर नई बस्ती (वार्ड नंबर 4) में नगर पालिका परिषद द्वारा स्थापित सरकारी आरओ प्लांट इन दिनों पूरी तरह से बेकार साबित हो रहा है। जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाया गया। यह आरओ एक निजी कवीर मंदिर परिसर के अंदर स्थापित है, जिसके चलते आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालात यह हैं कि आरओ कई महीनों से बंद पड़ा हुआ है और स्थानीय निवासी पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। यह वार्ड पार्षद पुष्पा अरविंद राजा के वार्ड अंतर्गत आता है, जहां इस प्रकार की मूलभूत सुविधा का ठप हो जाना नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकार ने इस योजना के तहत आरओ स्थापित किया था, तब उम्मीद थी कि मोहल्ले के लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिलेगा, लेकिन इसे ऐसे स्थान पर लगा दिया गया जहां आम नागरिकों की पहुंच ही नहीं है। मंदिर परिसर के अंदर होने के कारण लोग वहां जाकर आसानी से पानी नहीं भर सकते। कई बार मंदिर बंद रहता है, जिससे स्थिति और भी खराब हो जाती है। अब जब आरओ पूरी तरह से बंद पड़ा है, तो यह सुविधा केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है। गर्मी का मौसम शुरू होते ही पानी की समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। ऐसे में आरओ का बंद रहना लोगों के लिए भारी परेशानी का कारण बन गया है। मोहल्ले की महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्हें या तो दूषित पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है या फिर दूर-दूर से पानी लाना पड़ रहा है। मोहल्लेवासियों का कहना है कि यदि इस आरओ को समय रहते चालू नहीं कराया गया तो यह पूरी तरह खराब हो जाएगा, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में उदासीन बने हुए हैं और कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इस समस्या को लेकर स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी ललितपुर को शिकायत पत्र देकर मांग की है कि आरओ को किसी सार्वजनिक स्थान, जैसे सड़क किनारे या मोहल्ले के बीच में स्थापित किया जाए ताकि सभी लोग आसानी से इसका उपयोग कर सकें। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ हर नागरिक तक पहुंचना चाहिए, न कि किसी निजी परिसर तक सीमित रहना चाहिए। स्थानीय सामाजिक लोगों ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि इस प्रकार की लापरवाही से न केवल जनता को असुविधा होती है बल्कि सरकारी धन का भी दुरुपयोग होता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है।



