भारतीय सभ्यता और सनातन संस्कृति में विश्व बंधुत्व का भाव पर द्वि- दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य समापन

विश्वनाथ,असम : केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा, शिक्षा मंत्रालय,भारत सरकार तथा विश्वनाथ चारिआलि राष्ट्रभाषा प्रबोध विद्यालय परिचालना समिति , विश्वनाथ असम के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय सभ्यता और सनातन संस्कृति में विश्व बंधुत्व का भाव विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 21-22 जून को कृषि यंत्र प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान उत्तर पूर्वी क्षेत्र विश्वनाथ के वातानुकूलित प्रेक्षागृह में आयोजित हुआ। दो दिवसीय संगोष्ठी में उद्घाटन सत्र से शुरू प्रथम से चतुर्थ सत्र और समापन सत्र का आयोजन किया गया

जिस पावन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय , भारतीय भाषा केंद्र की अध्यक्षा प्रो० बंदना झा, विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय हिंदी संस्थान के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक प्रोफेसर हेमराज मीणा, रांची विश्वविद्यालय, हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ० जंग बहादुर पाण्डेय, शहीद भगत सिंह महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के आचार्य प्रो० सुनील कुमार तिवारी, संगोष्ठी मार्गदर्शक तथा तेजपुर विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के वरिष्ठ सहायक आचार्य डाॅ० अनुशब्द,केंद्रीय हिंदी संस्थान गुवाहाटी केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ० चंद्रशेखर चौबे, सारस्वत वक्ता के रूप में नेहू के सहायक आचार्य डॉ ० आलोक सिंह, असम राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के वरिष्ठ प्रचारक शंकर प्रसाद साहू, वरिष्ठ साहित्यकार हरिप्रसाद उपाध्याय, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्वनाथ जिला मुख्य मार्ग प्रमुख डा० सरजीत दास, संस्कृत विद्वान लोकनाथ उपाध्याय, विश्वनाथ महाविद्यालय के दार्शनिक शास्त्र के विभागाध्यक्ष तारानाथ महंत महाविद्यालय के हिंदी विभाग,अध्यापिका गीता वर्मा, संगोष्ठी मार्गदर्शक तथा तेजपुर विश्वविद्यालय, हिंदी विभाग के वरिष्ठ सहायक आचार्य डाॅ० अनुशब्द, अशोक कुमार प्रामाणिक , लोकप्रिय कवयित्री दिव्यांशु अवस्थी , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्वनाथ के प्रचारक कार्तिक गड़ ,विश्वनाथ चारिआलि नगरपालिका के अध्यक्ष अमरज्योति बरठाकुरआदि सारस्वत विद्वान और विदुषी मौजूद थे। सारस्वत अतिथि व विद्वान ने भारतीय सभ्यता और सनातन संस्कृति में विश्व बंधुत्व का भाव पर अपना विचार प्रकट किए।
समिति के अध्यक्ष प्रभुनाथ की अध्यक्षता में आयोजित उद्घाटन सत्र तथा समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रभुनाथ सिंह ने कहा कि आप सभी अतिथियों का यहां विश्वनाथ चेराली में आना और हमें सेवा का अवसर देना ही सौभाग्य की बात है।आप आये हम धन्य हुए। विशेष उद्घाटन सत्र में आरंभ में बीज वक्तव्य ऑनलाइन माध्यम से देते हुए केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के निदेशक प्रो० सुनील बाबुराव कुलकर्णी ने कहा कि जब विश्व तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा है,ऐसे समय में भारत का केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा विश्व बंधुत्व पर विमर्श कर रहा है-यह परम हर्ष का संदर्भ है।युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है, अपितु विश्व बंधुत्व की भावना से ही विश्व में अमन चैन एवं शांति की वंशी बज सकती है।
मुख्य अतिथि ने प्रो० बंदना झा ने कहा कि भारतीय सभ्यता और सनातन संस्कृति अति प्राचीन है और हमारी सनातन संस्कृति में देश प्रेम और विश्व बंधुत्व की भावना कूट कूट कर भरी हुई है। हमारे लिए अतिथि सर्वोपरि हैं।।इस दो दिवसीय सारस्वत संगोष्ठी में प्रो० सुनील बाबुराव कुलकर्णी , निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान एवं सचिव, केंद्रीय हिंदी शिक्षण मण्डल के संरक्षक में वि.चा. रा.भा.प्रबोध विद्यालय परिचालना समिति के अध्यक्ष प्रभुनाथ सिंह, संगोष्ठी मार्गदर्शक तथा तेजपुर विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के वरिष्ठ सहायक आचार्य डॉ० अनुशब्द , विश्वनाथ चारिआलि राष्ट्रभाषा प्रबोध विद्यालय परिचालना समिति के कार्यकरी अध्यक्ष सूर्य नारायण पाण्डेय,उपाध्यक्ष विनोद कुमार गुप्ता , कोषाध्यक्ष बजरंग रौनियार , सचिव तथा संगोष्ठी संयोजक संतोष कुमार महतो,सह-सांस्कृतिक सचिव व संगोष्ठी सह संयोजक मनीषा पाल, संगोष्ठी मुख्य सलाहकार हरि प्रसाद लुइटेल ,साधारण सलाहकार : चित्र प्रसाद पौडे़ल, प्रेम बिश्वकर्मा, सत्यप्रकाश गुप्ता, सुधन साहनी, सैयदा आनोवारा खातून , समिति के पदाधिकारी सह-सचिव सुरेन्द्र कुमार सहनी तथा राहुल मिश्रा,साहित्य सचिव मदन गोपाल साहू,सांस्कृतिक सचिव अरुण सहनी,सदस्य- सदस्यागण लोकनाथ शास्त्री ,बन्दना दास कल्पना पाल,ज्योति कुमारी दास , ऊषा देवी, विद्यार्थी आदि गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। इस समूचे राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक संतोष कुमार महतो ने आगत अतिथियों तथा विद्वतजनों को उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त की।



