मथुरा

भ्रष्टाचार की कहानी, उम्र से पहले ही ढली टंकी की जवानी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मथुरा। धौलीप्याऊ के चंद्रपुरी में 25 साल तक लोगों को जलापूर्ति करने के उद्देश्य से बनाई गई ढाई हजार किलो लीटर क्षमता की पानी की टंकी 25 माह भी न चल सकी। एक साल पहले ही अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की टीम ने ने टंकी को कंडम घोषित कर दिया था। इसके बाद भी आज तक टंकी ध्वस्त नहीं कराई गई। नगर निगम की यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अमृत योजना के तहत जल निगम ने तीन साल पहले बीएसए कॉलेज के पास और धौलीप्याऊ के चंद्रपुरी में 2500 किलो लीटर क्षमता की दो टंकियों का निर्माण कराया था। कार्य पूरा होने के बाद जल निगम ने इन टंकियों को नगर निगम के हैंडओवर कर दिया था। कहा था कि 25 साल तक निर्बाध इन टंकियों का प्रयोग किया जा सकेगा। हालांकि निर्माण के एक साल बाद ही बीएसए कॉलेज के निकट बनी पानी की टंकी अचानक धराशायी हो गई थी। इस हादसे में दो लोगों की मौत भी हो गई थी। उस समय मामले की जांच में भ्रष्टाचार की कहानी सामने आई थी। एएमयू की तकनीकी टीम ने मामले की जांच की थी।टीम ने घटिया सामग्री का प्रयोग करके टंकियों के निर्माण की बात कही थी। वहीं, चंद्रपुरी में बनी पानी की टंकी को भी कंडम घोषित कर दिया था। घटिया सामग्री से बनी ये टंकी वर्तमान में जर्जर हालत में है। जोरदार बारिश में कभी भी धराशायी हो सकती है। इसके बावजूद नगर निगम के अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं। हादसे के एक साल बाद भी चेतने को तैयार नहीं है। टंकी के आसपास घनी आबादी है। यहां के लोगों को हमेशा हादसे का डर सताता रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डर की वजह से वह अपने बच्चों को टंकी आसपास नहीं जाने देते हैं। टंकी हादसा होने के बाद लोगों में डर बैठ गया है कि कहीं बीएसए कॉलेज के निकट गिरी टंकी की तरह दूसरी टंकी भी धराशायी न हो जाए।
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