मुरादाबाद
जनता ढूंढ रही विकास नगर आयुक्त के संरक्षण में बजट का बंदरबांट कर रहे नीचे के अधिकारी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मुरादाबाद । महानगर में स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपए का बजट ठिकाने लग चुका है फिर भी चाहें पाॅश कालोनी कांठ रोड हो या महानगर का अंदरूनी एरिया हो विकास से अछूता रह गया पाॅश कालोनियों का हाल यह है कि गड्डे इतने गहरे कि धोखे से भी अगर कोई गांड़ी इन गड्ढो में आ जाये तो उसे मौत के मुंह से भगवान ही बचा सकते हैं
कहां जा रहा बजट का रुपए
शासन द्वारा भेजे जा रहे बजट के रुपए को नगर आयुक्त के संरक्षण में बंदरबांट कर रहे अधिकारी आइए बताते हैं कैसे सालभर पहले मुरादाबाद नगर निगम में निर्माण कार्य के लिए निविदाएं 30 से 40 पर्सेंट निम्न पर डलवा कर मंजूर की जा रही थी और मजे की बात कार्य संतोषजनक होने की रिपोर्ट भी लगाई जा रही थी परंतु जैसे ही नये साहब आये तो उन्होंने जेब भरने का नया तरीका निकाला कि निविदाएं 30-40% से एकदम मेनेज कराते हुए एस्टीमेट रेट पर डलवानी शुरू कर दी और भेद न खुल जाए इसलिए इस योजना में निगम के 275 ठेकेदारों में से मात्र 40-50 को ही शामिल किया गया और आजतक निविदाएं उन 40-50 ठेकेदारों के इर्द-गिर्द ही घूम रही है आइए निम्न का मतलब समझते हैं अगर कोई टैंडर 10 लाख की लागत का है तो पुराने दौर के 30% निम्न के हिसाब से वह 7 लाख पर मंजूर होगा और आज एस्टीमेट रेट वाली प्रक्रिया के हिसाब से वही 10 लाख का टैंडर 9 लाख 95 या 98 हजार रुपए में मंजूर हो रहा है इस तरह यदि आंकलन किया जाए तो हर 100 करोड़ रुपए के बजट पर निरंतर शासन को 30 करोड़ का नुकसान पहुंचाया जा रहा है जानकारी मिली है कि नगर आयुक्त फिर एक सूची निकालकर शासन को नुकसान पहुंचाने की योजना बना चुके हैं सूत्र बताते हैं कि इस सारे खेल में मुरादाबाद से विशाल नाम का और अन्य जिलों के मास्टरमाइंड ठेकेदार शामिल हैं अधिकारियों द्वारा ये खेल इसलिए खेला जा रहा है कि जब टैंडर एस्टीमेट रेट पर मंजूर होगा तो कमीशन भी उतना ही मोटा बनेगा
चीफ इंजीनियर से बात की गई उन्होंने यह कहकर बला टाल दी कि मैं तो पिछले महीने ही तबादला होकर आया हूं
क्या कहते हैं महापौर
मुरादाबाद के बेहद ईमानदार महापौर विनोद अग्रवाल मामले में अनभिज्ञता जताते हुए कहते हैं कि मुझे जानकारी नहीं है यदि ऐसा है तो गलत है मैं देखता हूं नाम न छापने की शर्त पर कुछ ठेकेदारों का यह भी कहना है कि मास्टरमाइंड ठेकेदारों ने खुलकर कह रखा है कि जिसे हम चाहेंगे वो टैंडर डालेगा और 10 पर्सेंट टैंडर मेनेज के नाम पर नगर आयुक्त को जायेंगे वो भी पहले इसलिए ही यदि हम टैंडर 10%-15% भी निम्न पर डालते हैं तो निरस्त कर दिए जाते हैं और जिनकी सैटिंग है उनके एस्टीमेट रेट पर भी मंजूर कर लिए जाते हैं जबकि ऐसा कोई शासनादेश नहीं है कि 10-15% डालने वालों के टैंडर निरस्त कर दिए जायें और एस्टीमेट रेट पर डालने वालों के टैंडर मंजूर कर लिए जायें पर फिर भी नगर निगम के अधिकारियों के यह कारनामे लगातार बरकरार है बाहराल अब देखना यह है कि शासन इस घोटाले पर संज्ञान लेता है या फिर यूं ही ये अधिकारी सरकारी खजाने को लूटते रहेंगे।




