असम

असम के गुवाहाटी स्थित स्वागत सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में प्रोफेसर सुभाष खन्ना के 

नेतृत्व में पूर्वी भारत का पहला रिमोट रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न ।

 नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम के गुवाहाटी स्थित स्वागत सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने पूर्वोत्तर भारत में पहली बार सफलतापूर्वक गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) निष्कासन शल्यक्रिया को अंजाम दिया। इसमें मेड-इन-इंडिया एसएसआई मास बोनोटिक सिस्टम का उपयोग कर गुवाहाटी के दो मरीजों की सर्जरी की गई, जो पूरी तरह सफल रही। लीड सर्जन प्रो. सुभाष खन्ना ने यह ऑपरेशन गुरुगाव से लगभग 1900 किलोमीटर दूर गुवाहाटी स्थित मरीजों पर नियंत्रण स्थापित करके किया। दोनों मरीज ऑपरेशन के बाद स्वस्थ हो गए हैं और 24 घंटे के भीतर ही दोनों को अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेजा जा सका। यह उपलब्धि चिकित्सा और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम द्वारा एकजुट प्रयास का परिणाम है। गुरुगाव से अभिवेश के साथ गुवाहाटी के स्वागत अस्पताल के विनय हजारिका ने इस जटिल आईटी समन्वय का नेतृत्व किया। पूरे प्रक्रिया में एयरटेल ने उच्च गति कनेक्टिविटी सुनिश्चित की और मानक से कहीं बेहतर, मात्र 40 मिलीसेकंड का लो-लेटेंसी कनेक्शन उपलब्ध कराया गया।संपूर्ण सर्जरी के दौरान स्वागत अस्पताल के चिकित्सकों में डॉ. अविंदम बरुआ , डॉ. प्रणव दास और डॉ. सुप्रिय चौधरी ने सहयोग प्रदान किया, जबकि एनेस्थीसिया का नेतृत्व डॉ. कणिनिका दास ने किया। इसके अतिरिक्त रोबोटिक क्लिनिकल टीम से विद्या देवी, अलबानीसा, बीना, लिपिका तथा बायोटेक्निशियन जिन्टू ने तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग दिया।उल्लेखनीय है कि स्वागत अस्पताल की निदेशक प्रो. डॉ. स्वागता खन्ना ने भी इस संपूर्ण सर्जरी प्रक्रिया को गुरुग्राम से ही मॉनिटर और नियंत्रित किया।
इस सफलता पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रो. सुभाष खन्ना ने कहा कि नई एवं नवोन्मेषी तकनीक को स्वीकार कर मरीजों का विश्वास जीतना आसान कार्य नहीं होता। दोनों मरीजों ने उन पर जो भरोसा जताया उसके लिए वे आभारी हैं। भौतिक उपस्थिति के बिना भी यदि मरीज सर्जरी करवाने को सहमत हुए तो यह उनके विश्वास का प्रमाण है।उन्होंने बताया कि इस प्रकार की सुविधा से टेली-कनेक्टिविटी के जरिए अब मरीज दुनिया के किसी भी कोने से विशेषज्ञ उपचार प्राप्त कर सकेंगे।रोबोटिक सर्जरी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि रिमोट रोबोटिक सर्जरी दुनिया के लिए नया नहीं है। इस पद्धति का पहला प्रयोग 2001 में फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में हुआ था, जब न्यूयॉर्क स्थित एक सर्जन ने गॉल ब्लैडर ऑपरेशन को रिमोटली अंजाम दिया था। लेकिन उच्च खर्च और कनेक्टिविटी की चुनौतियों के कारण यह प्रक्रिया लंबे समय तक सीमित रही। आज रोबोटिक्स, सुरक्षित संचार नेटवर्क और हाई-स्पीड डाटा ट्रांसमिशन की वजह से इसे पुनः विश्व स्तर पर अपनाया जा रहा है। विशेष तथ्य यह है कि भारत के अनेक प्रमुख कॉरपोरेट अस्पतालों में भी अभी तक ऐसी सर्जरी शुरू नहीं हुई है, जबकि गुवाहाटी के स्वागत सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने इसे सफलतापूर्वक कर दिखाया।उत्तर-पूर्व के लिए महत्व
इस उपलब्धि का दूरगामी प्रभाव असम और पूरे उत्तर-पूर्व भारत पर पड़ेगा। अब मरीजों को महंगे और लंबी यात्रा की आवश्यकता नहीं होगी। सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों तथा सैनिकों के लिए यह तकनीक आशा का नया द्वार खोलती है।विशेष रूप से प्रो. सुभाष खन्ना ने इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाकर असम को भारत की अत्याधुनिक शल्य-चिकित्सा तकनीक के मानचित्र पर एक नई पहचान दी है। इसके साथ ही राज्य की स्वास्थ्य सेवा में नया अध्याय जुड़ गया है। मरीजों की सुरक्षा और क्लिनिकल उपयुक्तता सुनिश्चित करते हुए इस सर्जरी को सावधानीपूर्वक नियोजित, तकनीकी रूप से समर्थित और संपूर्ण नैतिक समिति की अनुमति के तहत संपन्न किया गया। उल्लेखनीय है कि, असम के गुवाहाटी का स्वागत सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल एक अग्रणी मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल है, जो उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए समर्पित है। खासतौर से यह अस्पताल लेप्रोस्कोपिक, रोबोटिक और अब रिमोट रोबोटिक सर्जरी की आधुनिक तकनीक के लिए प्रसिद्ध है। इस सफलता के साथ, असम तथा पूरे उत्तर-पूर्व भारत को विश्वस्तरीय शल्य चिकित्सा सेवाओं से जोड़ने का काम यह अस्पताल निरंतर जारी रखे हुए है और असम को भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में शल्य-चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा हैं ।
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