उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण को जनांदोलन बनाने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने की नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति के कार्यों की समीक्षा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग (लघु सिंचाई) के कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान जल संकट को सामूहिक चुनौती बताते हुए उन्होंने चेक डैम, तालाबों और ब्लास्टकूपों के निर्माण को जनांदोलन का रूप देने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता करार देते हुए इसे पर्यावरणीय स्थिरता, कृषि उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का आधार बताया।
भूजल स्थिति में सुधार: प्रगति और लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने बताया कि सतत प्रयासों के फलस्वरूप प्रदेश में भूजल की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2017 में जहां 82 क्षेत्र अतिदोहित और 47 क्षेत्र क्रिटिकल थे, वहीं 2024 तक यह संख्या घटकर क्रमशः 50 और 45 रह गई है। इस प्रगति को संतोषजनक बताते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि आने वाले वर्षों में सभी अतिदोहित और क्रिटिकल क्षेत्रों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए प्रयास तेज किए जाएं। इसके लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
जल संरक्षण को जनांदोलन बनाने की रणनीति
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की सफलता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चेक डैम, तालाब और ब्लास्टकूप निर्माण को भी जनांदोलन का रूप दिया जाए। उन्होंने सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के कार्यों को गति देने के निर्देश दिए। इन प्रयासों से न केवल जल संकट से निपटा जा सकेगा, बल्कि कृषि, मत्स्य पालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
पारदर्शिता और जागरूकता पर जोर
मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जनपद में तालाबों, चेक डैमों और ब्लास्टकूपों का फोटोग्राफिक डॉक्यूमेन्टेशन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने सोशल मीडिया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जागरूकता अभियान चलाने पर बल दिया। यह अभियान जनता को जल संरक्षण के महत्व और सरकार के प्रयासों से अवगत कराएगा।
तकनीकी और वैज्ञानिक उपाय
बैठक में जल संरक्षण के लिए वैज्ञानिक उपायों पर चर्चा हुई। चेक डैम वर्षा जल को रोककर भूजल रिचार्जिंग में सहायक हैं, जबकि तालाब ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता और मत्स्य पालन को बढ़ावा देते हैं। ब्लास्टकूप जैसी तकनीकें उन क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रभावी हैं, जहां भूजल स्तर अत्यधिक नीचे है। इसके अतिरिक्त, वर्षा जल संचयन और ड्रिप इरिगेशन जैसी तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री का आधिकारिक बयान
मुख्यमंत्री ने कहा, “जल संकट हमारी सामूहिक चिंता का विषय है। चेक डैम, तालाब और ब्लास्टकूप जैसे उपाय भूजल रिचार्जिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह केवल स्थानीय आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्राथमिकता है। सतत प्रयासों से अतिदोहित और क्रिटिकल क्षेत्रों की संख्या में कमी आई है, लेकिन इसे और बेहतर करना होगा। जैसे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान ने वृक्षारोपण को जनांदोलन बनाया, वैसे ही जल संरक्षण को भी सामूहिक प्रयासों से गति दी जाए। यह न केवल जल संकट से निपटेगा, बल्कि कृषि, मत्स्य पालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा। हमारा संकल्प है कि उत्तर प्रदेश का यह मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर एक उदाहरण बने।”
नमामि गंगे योजना के तहत गंगा बेसिन में भूजल संरक्षण और नदी स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ग्रामीण जलापूर्ति विभाग (लघु सिंचाई) चेक डैम और ब्लास्टकूप जैसे उपायों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता और सिंचाई सुविधाओं को बढ़ा रहा है।
अपेक्षित परिणाम
1 .पर्यावरणीय स्थिरता: भूजल स्तर में सुधार और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों में कमी।
2 .आर्थिक विकास: तालाबों से मत्स्य पालन और भूजल रिचार्जिंग से कृषि उत्पादकता में वृद्धि।
3 .सामाजिक प्रभाव: जन जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी से जल संरक्षण का जनांदोलन।
4 .राष्ट्रीय मॉडल: उत्तर प्रदेश का जल संरक्षण मॉडल अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बनेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार जल संरक्षण और भूजल रिचार्जिंग के लिए दृढ़ संकल्पित है। चेक डैम, तालाब और ब्लास्टकूप जैसे उपायों को बड़े पैमाने पर लागू करने, सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाने और जागरूकता अभियानों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन बने। यह प्रयास पर्यावरण, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।




