गाजियाबाद
थाना प्रभारी पर पक्षपात और लापरवाही के आरोप, भाजपा सभासद बोले
“अंकुर बिहार थाने में शिकायत दर्ज कराना बन गया सरकारी लॉटरी… किस्मत हो तो लग जाए!”

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी, गाज़ियाबाद। अंकुर विहार थाना एक बार फिर सुर्खियों में है—और इस बार किसी अपराधी को पकड़ने की उपलब्धि पर नहीं, बल्कि शिकायत न सुनने की “अनूठी कार्यसंस्कृति” पर। नगरपालिका परिषद वार्ड 33 के भाजपा सभासद राम निवास त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि इस थाने में FIR दर्ज करवाना उतना ही कठिन है, जितना बिना जुगाड़ सरकारी दफ्तर में फाइल पास कराना।
सभासद का कहना है कि थाने में शिकायतकर्ता पहुंचे तो पुलिस सुनती जरूर है—लेकिन कार्यवाही की जगह आश्वासन और इंतज़ार का ट्रायल पैक फ्री में दिया जाता है।
सभासद के आरोप — संक्षेप में
शिकायत दर्ज नहीं होती, सिर्फ वापस लौटती है
अवैध शराब, वसूली और दबंगई खुलेआम—पुलिस मोड: म्यूट
फायरिंग पर भी कार्यवाही “धीमी इंटरनेट स्पीड” जैसी
शिकायत करने पर उल्टा शिकायतकर्ता पर ही केस
बिचौलियों के ज़रिए शिकायत वापस लेने का दबाव
त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने 30 अप्रैल 2025 को पहली शिकायत दी थी और तब से अब तक शिकायतें बढ़ती गईं—लेकिन पुलिस की कार्यवाही वही पुरानी रटी-रटाई लाइनों पर अटकी है:
“देखेंगे…”
“जांच चल रही है…”
“ऊपर भेज दिया है…”
“कल आना…”
सभासद का कहना है कि थाना प्रभारी अपराधियों पर ढीला रवैया अपनाकर उन्हें ‘ओपन पास’ दे रहे हैं, और यही कारण है कि क्षेत्र में अपराध लगातार बढ़ रहा है।
स्थानीय लोग बोले —
> “यहाँ अपराधियों का आत्मविश्वास पुलिस से ज़्यादा है और पीड़ित का भरोसा कानून से कम। अब तो आरोपी पहले वारदात करते हैं और फिर मज़े से कहते हैं— थाना तो हमारे ही आदमी का है।”
पुलिस उपायुक्त से की कार्यवाही की मांग
सभासद ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि:
थाना प्रभारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच हो
दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो
और क्षेत्र की कानून व्यवस्था में सुधार करते हुए अपराधियों पर अंकुश लगाया जाए
आखिरी सवाल जो जनता पूछ रही है:
> “अंकुर बिहार थाने में FIR दर्ज होगी या अब इसके लिए भी ऑनलाइन टोकन और प्रतीक्षा सूची शुरू करनी पड़ेगी?”


