
रांची महासम्मेलन को सफल बनाने का संकल्प
नेशनल प्रेस टाइम्स व्यूरो
गोड्डा : कर्मचारियों की विभिन्न मांगों के समर्थन में झारखंड ऑफिसर्स, टीचर्स एंड एम्पलाइज फेडरेशन (झारोटेफ) द्वारा आगामी 20 सितम्बर को रांची में आयोजित “कर्मचारी संकल्प महासम्मेलन” को सफल बनाने को लेकर महागामा प्रखंड में सघन अभियान चलाया गया। जिला संयुक्त सचिव मुरारी प्रसाद शर्मा और जिला उपाध्यक्ष सह अनुमंडल प्रवक्ता रीतेश रंजन के नेतृत्व में प्रखंड कार्यकारिणी के सदस्यों ने दर्जनों विद्यालयों का दौरा कर शिक्षकों एवं कर्मचारियों से संवाद किया तथा सम्मेलन में भाग लेने का आह्वान किया।
ज्ञात हो कि शिक्षकों की एमएसीपी (मध्यवर्ती पदोन्नति योजना), सेवानिवृत्ति की उम्र 62 वर्ष करने तथा शिशु शिक्षण भत्ता लागू करने की मांग को लेकर झारोटेफ पिछले एक वर्ष से चरणबद्ध आंदोलन कर रहा है। अब तक हस्ताक्षर अभियान, ध्यानाकर्षण रैली, जन समर्थन रैली और कर्मचारी शक्ति समागम जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से कर्मचारियों को जागरूक कर अपनी मांगों के पक्ष में जन समर्थन जुटाया गया है। आगामी महासम्मेलन इस आंदोलन का अंतिम और सबसे बड़ा चरण होगा।
प्रखंड संयुक्त सचिव नियाज अहमद ने कहा, “चार चरणों का कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा है। अब पाँचवें चरण की तैयारी को देखकर हमें विश्वास है कि यह सम्मेलन झारखंड के कर्मचारी आंदोलन के इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना साबित होगा। हम सभी कर्मचारियों को रांची पहुंचकर इस अभियान को मजबूत बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि एमएसीपी (मध्यवर्ती पदोन्नति योजना) का मुद्दा सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने 2024 के विधानसभा चुनावी घोषणा पत्र में प्रमुखता से शामिल किया था, जबकि शिशु शिक्षण भत्ता को लेकर सरकार ने विधानसभा में सैद्धांतिक रूप से सहमति भी दी है। कई राज्यों में सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई है, ऐसे में जीवन प्रत्याशा को देखते हुए 62 वर्ष की सेवानिवृत्ति उम्र को लागू करना जनहित और राज्यहित दोनों में आवश्यक है।
अभियान के तहत महुवारा, लौगाय, मंसूरा, असोता, श्रीमतपुर, नयानगर, जटामा, शीतल, दिग्घी, मोहानी, सामुकित्ता और सिनपुर विद्यालयों का भ्रमण कर शिक्षकों से संवाद किया गया। इस दौरान प्रखंड उपाध्यक्ष नीलेश कुमार, शहजाद अनवर, राजेंद्र पंडित समेत कई प्रमुख सदस्य मौजूद थे।
झारोटेफ का कहना है कि “रांची में होने वाला यह महासम्मेलन कर्मचारियों की एकजुटता और संघर्ष का प्रतीक बनेगा तथा शिक्षकों व कर्मचारियों की लंबित मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुंचाएगा।




