असम के विश्वनाथ जिले के चतिया के कवि-लेखक विश्वजीत सुत को असम सरकार का ‘युव लेखक सम्मान’।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम के विश्वनाथ जिले के चतिया के उत्तर पार डिप्लोंगा बालिजान गांव के उदयमान कवि, लेखक, समाजसेवी और पत्रकार विश्वजीत सुत को 24 दिसंबर को गुवाहाटी खानापाड़ा में आयोजित असम पुस्तक मेला में 2025 ग्रंथ वर्ष के लिए असम सरकार द्वारा ‘युव लेखक सम्मान’ प्रदान किया गया। इस सम्मान वितरण समारोह में उपस्थित युवा लेखकों को उनकी सृजनात्मक रचनाओं के लिए प्रोत्साहन भरा संदेश देकर प्रेरित करने वाले असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा और शिक्षा मंत्री डॉ. रणोज पेगू ने युवा लेखक सुत को सम्मानित किया। युवा लेखक सम्मान प्राप्तकर्ता विश्वजीत सुत शिक्षक बकुल सुत और प्रेमलता बरा के योग्य संतान हैं। बचपन से ही साहित्य जगत से जुड़कर निरंतर साहित्य साधना करने वाले विश्वजीत सुत ने कवि व लेखक के रूप में अपनी अभूतपूर्व उपलब्धियों के लिए यह सम्मान अर्जित किया।प्रकाशन परिषद के सहयोग से असम सरकार ने उन्हें 25 हजार रुपये नकद पुरस्कार प्रदान किया और बाद में प्रमाण पत्र प्रदान करने की घोषणा की। विश्वजीत सुत एक शिक्षक होने के साथ-साथ विभिन्न कार्यक्रमों का सफल संचालन कर रहे हैं। कवि व लेखक के रूप में उन्हें कवि सम्मान वाणी 2021, असम गौरव सम्मान वाणी 2021, शंकर आजान समन्वय वाणी 2021, साहित्य सुरभि वाणी 2022, साहित्य प्रेयसी का श्रेष्ठ कवि-साहित्यिक वाणी 2022, रुद्र साहित्य प्रेरणा वाणी 2022-23, साहित्य सौरभ सम्मान 2023, असम उदयादित्य शुभाषा वाणी 2024, निआरर फुल सम्मान 2024 आदि अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।विश्वजीत सुत असम साहित्य सभा के आजीवन सदस्य होने के साथ ही असम साहित्य सभा की क्षुद्र आलोचना प्रचार प्रसार संरक्षण एवं संवर्धन उप-समिति के सदस्य, विश्वनाथ जिला रामधेनु उप-समिति के अध्यक्ष, श्रीमंत शंकरदेव संघ तेजपुर जिला शाखा के कार्यनिर्वाहक सदस्य, बुनियाद की साहित्य एवं शिक्षा शाखा के संपादक, सदौ असम साहित्य सम्मिलन के आजीवन सदस्य, सदौ असम सुत छात्र संथा के कार्यकारी सभापति, बालिजान युवक संघ के सभापति, बालिजान की शैक्षिक-सांस्कृतिक उपसमिति के संपादक, असम बात और गणस्तंभ काकत के पत्रकार आदि अनेक दायित्व निभा रहे हैं।पहले चेंगामारी शाखा साहित्य सभा में सक्रिय रहकर दो बार संपादक के रूप में कार्य करने के साथ ही श्रीमंत शंकरदेव संघ नागशंकर आंचलिक साहित्य शाखा के संपादक तथा प्रगतिशील साहित्य परिषद असम के सहायक संपादक के रूप में भी उन्होंने दायित्व निभाया। वे रास, भाओना, असम साहित्य सभा, श्रीमंत शंकरदेव संघ, नाट्य समाज, विश्वनाथ के रुद्र गोश्ठी, विभिन्न साहित्य-सांस्कृतिक कार्यक्रम, कलाकार संगठन, क्रीड़ा भारती, छात्र संथा आदि से जुड़े हैं। सुत का ‘अनुभव के पृष्ठात शब्द की बर्षण’ नामक काव्य ग्रंथ प्रकाशित हो चुका है। उनकी कविताएं बालिजान, रुद्र, रूपही पार की कविता, ज्योतिमंजुरी, साहित्य की सुवास, निआरर फुल, एहेजार कवि और कविता, पदातिक, सेजुजियार संधांत, कलंग सौरभ, पाटकाई, प्रज्ञा कस्तूरी, फागुन, सिपरिया दर्पण, शब्दबाक, सोनोरनत, सम्प्रीतिर एनाजरी, गुप्तकाशी, अभियात्री, सहस्र कवि की सहस्र कविता, उमावनोर पराश, ज्ञानोदय, प्रतिति, लखाईतारा आदि एक सौ से अधिक पत्र-पत्रिकाओं, काव्यलोचनियों, बटरी-काकत में प्रकाशित हो चुकी हैं। ‘सहस्र कवि की सहस्र कविता’ में विश्वजीत सुत की कविता प्रकाशित होने पर यह India Book of Records में स्थान पाकर सुत को प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ। इस वर्ष श्रीमंत शंकरदेव संघ की साहित्य शाखा से साहित्य शाखा के विचारक के रूप में मान्यता प्राप्त की। विश्वजीत सुत ने चतिया और गुवाहाटी ज्योति चित्रवन में अभिनय प्रशिक्षण लिया और असम के लोकप्रिय धारावाहिक ‘बेहराबारी आउट पोस्ट’ में अभिनय का अवसर प्राप्त किया।सुत असम के विभिन्न साहित्य-सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कवि सम्मेलनों, गांव व क्षेत्रीय सामाजिक आयोजनों से गहराई से जुड़े हैं। उनके सफलता पर अनेक शुभचिंतक और विभिन्न आयोजन-संस्थाओं ने बधाई दिया है ।



