गाजियाबाद
लोनी में स्वच्छ भारत मिशन ‘कोमा’ में — कूड़े के ढेरों पर प्रशासन की खामोशी
करोड़ों खर्च, गंदगी बरकरार… जनता परेशान, अधिकारी बेफिक्र
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी (गाजियाबाद)। नगर पालिका परिषद क्षेत्र लोनी में स्वच्छता व्यवस्था का हाल ऐसा है कि लगता है जैसे स्वच्छ भारत मिशन यहाँ दम तोड़ने की तैयारी में है। कूड़े के ढेर पहाड़ बन चुके हैं, दुर्गंध नई पहचान… और करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद हालात ठीक वहीं खड़े हैं* — ज्योँ के त्यों।
सभासद बोले — *सफाई नहीं, सिस्टम की ‘धुलाई’ हो रही है
*शकई सभासदों का आरोप है कि नगर पालिका में सफाई से पहले जवाबदेही का सफाया किया जा रहा है। वे कहते हैं कि शिकायत उठाइए — फाइल आगे बढ़ेगी, मीटिंग होगी*, *आश्वासन मिलेगा… और फिर सब कुछ वहीं रुक जाएगा जहाँ से शुरू हुआ था।
*सभासदों के मुताबिक, जो जनप्रतिनिधि खामियों पर आवाज़ उठाते हैं, उन्हीं के वार्डों में सफाई कर्मचारियों की संख्या कम कर दी जाती है* — *मानो सफाई नहीं, सियासत की झाड़ू चलाई जा रही हो*।
अधिशासी अधिकारी पर सवाल — पद भारी या जिम्मेदारी*?
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी पर भी उंगलियाँ उठ रही हैं*। *आरोप है कि फाइलों में काम पूरा हो जाता है, लेकिन जमीन पर न नतीजे दिखते हैं, न बदलाव*।
विरोधियों का तंज
अधिकारी साहब हर विवाद में मौजूद रहते हैं*,
बस सफाई व्यवस्था में नज़र नहीं आते।*”
लोग पूछ रहे हैं
जब हर मुद्दे पर विवाद, नाराज़गी और अव्यवस्था बनी हुई है, तो फिर स्थानांतरण की फाइल किसे ढूँढ रही है?
नेता नाराज, जनता बेहाल — लेकिन सिस्टम खुश*
चैयरमैन नाराज…
सभासद नाराज…
विधायक नाराज…
जनप्रतिनिधि नाराज…
और जनता ?
वह तो गंदगी, मच्छरों और बदबू के साथ जीने की मजबूरी में त्रस्त है।
उधर दफ्तरों में कुर्सियाँ शांत हैं
जनता त्रस्त, अधिकारी मस्त — व्यवस्था ध्वस्त।
कूड़ा बढ़ रहा है… और सवाल भी
सवाल यह नहीं कि कूड़ा इतनी मात्रा* *में क्यों है,
सवाल यह है कि करोड़ों रुपये आखिर जाते कहाँ हैं?
जब तक जवाबदेही की झाड़ू नहीं चलेगी,
तब तक कूड़ा नहीं, सिस्टम जमा होता रहेगा ।



