ललितपुर
वाहों वाहों गोविंद सिंह आपे गुरु चेला
श्रीगुरु गोबिंद सिंह जी महाराज का प्रकाश पर्व हर्षोल्लास के साथ संपन्न

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। श्रीगुरुसिंह सभा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तत्वाधान में श्रीगुरु गोविंद सिंहजी महाराज का प्रकाश पर्व धूमधाम व श्रद्धा भावना के साथ मनाया गया।सुबह श्रीअखंड पाठ साहिब जी की समाप्ति सरदार अवतार सिंह द्वारा हुई। निशान साहब के चोले की सेवा सरदार रणवीर सिंह परमार, ओंकार सिंह सलूजा द्वारा हुई। पटियाला से आए रागी जत्था इंद्रजीत सिंहजी ने गुरबाणी कीर्तन ब कथा करते हुए बतलाया की श्रीगुरु गोबिन्द सिंह जी ऐसे इतिहास पुरूष थे, जिन्होनें ताउम्र अन्याय, अधर्म, अत्याचार और दमन के खिलाफ तलवार उठाई और लड़ाईयां लड़ी। गुरूजी की तीन पीढिय़ों ने देश धर्म की रक्षा के लिए महान बलिदान दिया। अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा ने कहा कि गुरु गोबिन्द सिंह सिक्खों के दसवें गुरु थे। वे एक महान दार्शनिक, प्रख्यात कवि, निडर एवं निर्भीक योद्धा, युद्ध कौशल, महान लेखक और संगीत के पारखी भी थे। गुरु गोबिंद सिंह ने एक खालसा वाणी वाहे गुरुजी का खालसा, वाहे गुरुजी की फतेह स्थापित की। साथ ही उन्होंने आदर्शात्मक जीवन जीने और स्वयं पर नियंत्रण के लिए खालसा के पांच मूल सिद्धांतों की भी स्थापना की। जिनमें केस, कंघा, कड़ा, कछ, किरपाण शामिल है। ये सिद्धान्त चरित्रनिर्माण के मार्ग थे। गुरु गोबिंद सिंहजी ने अपने जीवन में आनंदपुर, भंगानी, नंदौन, गुलेर, निर्मोहगढ, बसोली, चमकोर, सरसा व मुक्तसर सहित 14 युद्ध किए। इन जंगों में मुगल सूबेदारों ने हर बार मुंह की खाई। सितम्बर 1708 में गुरू जी दक्षिण में नांदेड़ चले गए और बैरागी लक्ष्मण दास को अमृत छका और युद्व कौशल से पारंगत कर बंदा सिंह बहादुर बनाया और उन्हें खालसा सेना का कमाण्डर बनाकर संघर्ष के लिए पंजाब भेज दिया। पंजाब पहुंच कर बन्दा सिंह बहादुर ने चप्पा चीड़ी की जंग जीती। अक्तूबर 1708 में महाराष्ट्र के नांदेड़ साहिब में गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आखिरी सांस ली। इस प्रकार से पहले पिता गुरु तेग बहादुर सिंह, फिर चारों पुत्रों ने और बाद में श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने स्वयं बलिदान देकर धर्म की रक्षा की। स्वामी विवेकानंद जी ने गुरू गोबिंद सिंह जी को एक महान दार्शनिक, संत, आत्मबलिदानी, तपस्वी और स्वानुशासित बताकर उनकी बहादुरी की प्रशंसा की थी। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था मुगल काल में जब हिन्दु धर्मों के लोगों का उत्पीडऩ हो रहा था तब श्री गुरू गोबिंद जी ने अन्याय, अधर्म और अत्याचारों के खिलाफ और उत्पीडि़त जनता की भलाई के लिए बलिदान दिया था जो एक महान बलिदान है। इस प्रकार से गुरू गोबिंद सिंह जी महानों में महान थे। इस दौरान श्रीराम हनुमान जयंती महोत्सव समिति अध्यक्ष पं.बृजेश चतुर्वेदी, बब्बू राजा, महेश श्रीवास्तव, दीपक चौबे, धु्रव राजा, सुरेंद्र राठौड़, आशुतोष चौहान, ओ.पी.रिछारिया, चंद्रशेखर राठौर, दीप सिंह सलूजा, परमजोत सिंह सलूजा, प्रगुण सिंह, प्रभजोत सिंह, विशाल सिंह, आशीष श्रीवास्तव, तय्यब खान, केदार सिंह, बलदेव सिंह, नगर कीर्तन शोभा यात्रा में विशेष सहयोग देने के लिए सरोपा व सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। लंगर की सेवा ओंकार सिंह आकाश सलूजा, सरदार अवतार सिंह, वीरेंद्र सिंह बीके, स्वर्गीय नरेंद्र सिंह सागरी, दूध की सेवा हरकीरत सिंह, बलदेव सिंह, चरण जीत सिंह परिवार द्वारा हुई। इस दौरान ओंकार सिंह, हरविंदर सिंह, मनजीत सिंह सलूजा, परमजीत सिंह, जगजीत सिंह बॉबी, चरणजीत सिंह, रविंदर सिंह राणा, पत्रकार राजीव श्रीवास्तव, परसन सिंह, पलविंदर सिंह, मेजर सिंह, जसपाल सिंह, मनिंदर सिंह, जगजीत सिंह, दलजीत सिंह, सतनाम सिंह भाटिया, अशोक स्वर्णकार, रविंद्र पाठक, राजू सिंधी, गोपी सिंधी, कन्हैयालाल सिंधी, ज्ञानी दलजीत सिंह, ज्ञानी राय सिंह, ज्ञानी गुरचरण सिंह, बिंदु कालरा, हरजीत कौर, मनप्रीत कौर सलूजा, अमरजीत कौर सलूजा, मनजीत कौर, मानवेंद्र कौर आदि उपस्थित थे। संचालन महामंत्री सुरजीत सिंह सलूजा ने किया।
