उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची का बड़ा संशोधन
SIR के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी, 2.89 करोड़ नाम हटाए गए

लखनऊ : भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) पूरा करने के बाद आज ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित कर दी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने लोकभवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि पूर्व में 15.44 करोड़ मतदाताओं की सूची से 2.89 करोड़ (18.70%) नाम हटा दिए गए हैं। अब राज्य में 12.55 करोड़ मतदाता रह गए हैं।
यह सफाई मुख्य रूप से मृतकों, स्थायी रूप से स्थानांतरित/अनुपस्थित व्यक्तियों तथा एक से अधिक स्थानों पर डुप्लिकेट पंजीकरण वाले मतदाताओं के नाम हटाने के लिए की गई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं: मतदाताओं से प्राप्त गणना प्रपत्र (Enumeration Forms): 12.55 करोड़ (81.30%) मृत मतदाता: 46.23 लाख (2.99%) स्थानांतरित / अनुपस्थित मतदाता: 2.17 करोड़ (14.06%) एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत (डुप्लिकेट) मतदाता:25.47 लाख(1.65%)
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 91 प्रतिशत से अधिक मैपिंग पूरी हो चुकी है, जिससे अधिकांश मतदाताओं को अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। शेष 8.5% ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे, जिन्हें निर्धारित दस्तावेज (जैसे 2003 SIR सूची में नाम का प्रमाण या अन्य वैध आईडी) जमा करने होंगे। समय-सारिणी: ड्राफ्ट सूची प्रकाशन: 6 जनवरी 2026 दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि: 6 जनवरी 2026 से 6 फरवरी 2026 तक (फॉर्म-6, 7 या 8 के माध्यम से नाम जोड़ने/संशोधन/आपत्ति) दावों/आपत्तियों का निस्तारण एवं नोटिस चरण: 6 जनवरी 2026 से 27 फरवरी 2026 तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन: 6 मार्च 2026
मतदाता अपना नाम जांचने के लिए आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in या ceouttarpradesh.nic.in पर EPIC नंबर, नाम या मोबाइल नंबर से सर्च कर सकते हैं। यदि नाम नहीं मिलता, तो तुरंत फॉर्म-6 भरकर BLO के माध्यम से या ऑनलाइन आवेदन करें। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन एवं पारदर्शी बनाने के लिए है, ताकि कोई योग्य मतदाता वंचित न रहे। यह SIR अभियान 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहा है, जिसमें उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक (18.70%) नाम हटाए गए हैं। राजनीतिक दलों ने इस पर प्रतिक्रिया दी है, लेकिन आयोग का जोर योग्य मतदाताओं की सुरक्षा पर है।




