ललितपुर

कर्नाटक में बंधक बनाकर मजदूरी कराने का मामला

जिला प्रशासन के अथक प्रयास से बंधनमुक्त कराये गये मजदूर

जन साहस संस्था के जरिए ललितपुर वापस लाये गये मजदूर
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। जिले की तहसील मड़ावरा अंतर्गत मध्य प्रदेश के बॉर्डर एरिया से लगे ग्राम पापड़ा और सौल्दा गांव से सागर जिले का एक ठेकेदार लोगों को मजदूरी के नाम पर अधिक रुपये दिलाने का लालच देकर अपने साथ ले गया। मजदूरों को महाराष्ट्र के नागपुर ले जाने की बात तय करते हुये ठेकेदार ने मजदूरों को कर्नाटक ले जाकर साढ़े चार लाख रुपये में बेच दिया। यह बात ललितपुर प्रशासन के अथक प्रयास से बंधन मुक्त कराकर ललितपुर वापस लाये गये मजदूरों ने बतायी।
गौरतलब है कि ललितपुर प्रशासन ने कर्नाटक में बंधक बनाकर रखे गए 17 मजदूरों और 20 बच्चों समेत कुल 37 लोगों को मुक्त कराया है। गुरुवार को सभी को ललितपुर लाया गया, जहां पीडि़तों ने अपनी आपबीती सुनाई। मजदूरों ने बताया कि उनसे जबरन 12 से 13 घंटे तक काम कराया जाता था और मजदूरी के नाम पर केवल आटा और मामूली पैसे दिए जाते थे। मुक्त कराए गए बच्चों में 14 वर्षीय दामिनी ने बताया कि वह अपने माता-पिता के साथ काम पर गई थी। ठेकेदार ने उससे भी मजदूरी कराई और रोजाना 12 घंटे काम कराया। सात दिन में एक परिवार को केवल पांच किलो आटा दिया जाता था, जो पर्याप्त नहीं था, जिसके कारण कई बार उसे भूखा रहना पड़ता था। 14 वर्षीय किशोर ने बताया कि वह भी परिजनों के साथ गया था और मना करने पर मारपीट की धमकी दी जाती थी। वहीं 11 वर्षीय किशोर ने बताया कि उनसे सुबह छह बजे से शाम सात बजे तक काम कराया जाता था। शाम को उनसे ही ट्रक लोड कराया जाता था। मजदूर जीवन ने बताया कि सागर निवासी एक ठेकेदार जिसका नाम भाईजान बताया जा रहा है उन्हें 28 अक्टूबर को गन्ना कटाई के लिए प्रतिदिन 500 रुपए देने का लालच देकर उन्हें नागपुर ले गया। वहां से महाराष्ट्र नागपुर के चंडी ले जाया गया, जहां 15 दिन कपास की कटाई कराई गई। इसके बाद दीपक नामक युवक उन्हें 50 किलोमीटर दूर ले जाने की बात कहकर ट्रक से करीब 400 किलोमीटर दूर कर्नाटक ले गया और बागलकोट जिले की बदामी तहसील के ग्राम निरालगी में अशोक मुंडा के पास छोड़ दिया। यहां उनसे रोज सुबह छह बजे से शाम सात बजे तक गन्ना कटाई और ट्रक में गन्ना भरवाने का काम कराया जाता था। भागने की कोशिश करने पर उन्हें पकड़कर वापस ले आया जाता था। मजदूरों ने बताया कि सात दिन में एक परिवार को केवल पांच किलो आटा और ढाई सौ रुपए दिए जाते थे। मजदूरी मांगने पर गोविंद और रामावतार के साथ मारपीट की गई। करीब ढाई महीने तक सभी को बंधक बनाकर रखा गया और मजदूरी भी नहीं दी जा रही थी। दो नाबालिग बच्चों से भी गन्ना कटाई कराई जा रही थी। किसी तरह मजदूर राजकुमार ने 29 दिसंबर को मोबाइल से घर फोन कर पूरी जानकारी दी। इसके बाद गोरेलाल निवासी सोल्डा की पत्नी वती ने जिलाधिकारी सत्य प्रकाश से शिकायत की। जिलाधिकारी ने तुरंत कर्नाटक प्रशासन से संपर्क किया। सहरिया आदिवासियों के उत्थान के लिए कार्य कर रही जन साहस स्वयंसेवी संस्था की टीम जिला कॉर्डीनेटर राजेश कुमार के नेतृत्व में 1 जनवरी को कर्नाटक रवाना हुई और 3 जनवरी को कर्नाटक प्रशासन के सहयोग से सभी मजदूरों और बच्चों को मुक्त कराया गया।
कर्नाटक राज्य में बागलकोट जिले के बादामी थाने में ठेकेदार पर एफआईआर
बताया जा रहा है कि बागलकोट जिले के बादामी में तैनात राजस्व निरीक्षक हुसैनसाब लालसाब चौधरी ने महाराष्ट्र के जिला बीड दैपर निवासी दीपक श्रीहरी तोंबरे व अशोक मलुराम मुंडे के खिलाफ बंधुआ मजदूरी कराने के आरोप में शिकायती पत्र दिया है। शिकायत के आधार पर कर्नाटका पुलिस ने दोनों के खिलाफ बीएनएस की धारा 143 (3) व बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम 1976 की धारा 16, 17, 18 व 19 के तहत एफआईआर दर्ज की है।
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