बागपत

विशेष बातचीत: डॉ. वत्सला निधि से

डॉ. वत्सला निधि (MBBS, MD – Ophthalmology, Fellowship) का
संवाददाता: सुरेंद्र मलानिया के साथ एक सधा हुआ, प्रोफेशनल और जनहित से जुड़ा इंटरव्यू प्रस्तुत है—
 आंखों की रोशनी, समाज की ज़िम्मेदारी
विशेष बातचीत: डॉ. वत्सला निधि से
प्रश्न:
डॉ. वत्सला निधि जी, सबसे पहले आपका स्वागत है। कृपया अपने शैक्षणिक सफर और वर्तमान कार्य के बारे में बताइए।
उत्तर:
धन्यवाद। मैंने MBBS और MD (ऑफ्थैल्मोलॉजी) की पढ़ाई पूरी की है, इसके बाद आंखों की जटिल बीमारियों के उपचार हेतु फेलोशिप की। वर्तमान में मैं बड़ौली स्थित आनंद हॉस्पिटल में नेत्र रोग विशेषज्ञ के रूप में सेवाएं दे रही हूं। मेरा उद्देश्य है कि आधुनिक तकनीक के साथ लोगों को सुलभ और भरोसेमंद नेत्र उपचार मिल सके।
प्रश्न:
ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में आंखों से जुड़ी कौन-सी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं?
उत्तर:
यहां सबसे अधिक मोतियाबिंद, चश्मे की जरूरत, आंखों में इंफेक्शन, बच्चों में दृष्टि दोष और बुजुर्गों में ग्लूकोमा जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। कई बार जानकारी की कमी के कारण लोग समय पर जांच नहीं करा पाते, जिससे समस्या बढ़ जाती है।
प्रश्न:
आनंद हॉस्पिटल में किस प्रकार की नेत्र सेवाएं उपलब्ध हैं?
उत्तर:
यहां आंखों की संपूर्ण जांच, मोतियाबिंद ऑपरेशन, रेटिना संबंधी जांच, बच्चों की आंखों का इलाज, चश्मा परामर्श और आधुनिक मशीनों से डायग्नोसिस की सुविधा उपलब्ध है। हमारा प्रयास रहता है कि मरीज को सही सलाह और सही समय पर उपचार मिले।
प्रश्न:
आज के डिजिटल युग में मोबाइल और स्क्रीन का आंखों पर क्या असर पड़ रहा है?
उत्तर:
लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन, सिरदर्द और दृष्टि धुंधली होने की समस्या बढ़ रही है। मैं सभी से आग्रह करूंगी कि 20-20-20 नियम अपनाएं—हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें।
प्रश्न:
आम लोगों के लिए आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
उत्तर:
आंखें बहुत अनमोल हैं। साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर कराएं, बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान दें और किसी भी परेशानी को नजरअंदाज न करें। समय पर इलाज से आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है।
संवाददाता:
डॉ. वत्सला निधि जी, आपके बहुमूल्य समय और उपयोगी जानकारी के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।
डॉ. वत्सला निधि:
धन्यवाद, मुझे खुशी है कि इस माध्यम से मैं लोगों तक जागरूकता का संदेश पहुंचा सकी।
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