किसान और ग्रामीणों को साधन की गई कवायद
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। भारत का बजट 2026 केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक दिशा और भविष्य की प्राथमिकताओं का घोषणा पत्र है। जब वैश्विक अर्थव्यवस्था व्यापार युद्धों, टैरिफ संकटों और मंदी की आशंकाओं से जूझ रही है, तब भारत ने इस बजट के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह विकास, वित्तीय अनुशासन और सामाजिक स्थिरता को साथ लेकर आगे बढऩा चाहता है। यह बजट किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों को ठोस राहत देता है, कर ढाँचे को सरल बनाता है और पूंजीगत व्यय में ऐतिहासिक बृद्धि कर दीर्घकालीन विकास की नींव रखता है। लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाता है कि क्या तात्कालिक रोजगार संकट और महँगाई जैसी चुनौतियों का समाधान इसमें पर्याप्त रूप से मौजूद है।
नफा (फायदे)
कर ढांचे में सरलता- नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 कर प्रणाली को आसान बनाता है, जिससे आम परिवारों को समझने और पालन करने में सुविधा होगी। महिलाओं और युवाओं पर ध्यान, कौशल विकास, उद्यमिता और सामाजिक योजनाओं में निवेश बढ़ा है, जिससे परिवार के युवा और महिलाएँ नए अवसर पा सकते हैं। किसानों के लिए राहत- 1.37 लाख करोड़ का सीधा आवंटन, एमएसपी की गारंटी और पेंशन योजनाएं, ग्रामीण परिवारों को स्थिर आय का सहारा। इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, सड़कों, सिंचाई और भंडारण पर खर्च बढऩे से ग्रामीण और शहरी दोनों परिवारों को दीर्घकालीन लाभ मिलेगा।
नुकसान (कमियां)
सीधी कर राहत की कमी: मध्यम वर्ग को टैक्स में तात्कालिक राहत नहीं मिली, जिससे मासिक बजट पर दबाव बना रहेगा।
मंहगाई का असर- रोजमर्रा की जरूरतों (खाद्य, शिक्षा, स्वास्थ्य) पर खर्च कम करने के लिए ठोस कदम सीमित हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा: घोषणाएँ हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर असर अभी भी अधूरा है।
पुराने वादों की पुनरावृत्ति-कई योजनाएँ पहले से चल रही हैं, जिससे यह बजट नई बोतल में पुरानी शराब जैसा प्रतीत होता है।
निष्कर्ष
ग्रामीण परिवारों और किसानों को इस बजट से अपेक्षाकृत अधिक राहत मिली है।
शहरी मध्यम वर्ग को कर और महँगाई से तात्कालिक राहत कम मिली है।
दीर्घकालीन विकास और वित्तीय अनुशासन पर सरकार का ज़ोर है, लेकिन आम परिवार की रोजमर्रा की ज़िंदगी में राहत सीमित है।