सिंगरौली

स्वास्थ्य विभाग में आदेशों की अनदेखी

सिंगरौली ड्रग स्टोर प्रभारी का तबादला फाइलों में ही अटका..

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली  । सिंगरौली जिले में स्वास्थ्य विभाग में अनुशासन और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। संयुक्त संचालक (जेडी) स्वास्थ्य सेवाएं संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, रीवा द्वारा जारी स्पष्ट आदेश के बावजूद सिंगरौली में ड्रग स्टोर प्रभारी को अब तक नहीं बदला गया है। यह स्थिति न सिर्फ उच्च अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना को दर्शाती है, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा रही है।
जानकारी के अनुसार, जिले में करीब 10 वर्षों तक ड्रग स्टोर प्रभारी रहे फार्मासिस्ट राजेश बहादूर सिंह पड़वार को हटाकर किसी अन्य फार्मासिस्ट को प्रभार देने के निर्देश 29 सितंबर को जारी किए गए थे। इसके बावजूद अब तक आदेश पर अमल नहीं हो पाया है।
अनियमितताओं के आरोप, फिर भी मिला प्रभार
सूत्रों के मुताबिक, सी.एस. में ड्रग स्टोर प्रभारी रहे राजेश बहादूर सिंह पड़वार और सीएमएचओ कार्यालय में पदस्थ संजय सिंह पर पूर्व में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लग चुके हैं। इन्हीं आरोपों के चलते नवंबर 2019 में स्वास्थ्य संचालनालय के आदेश पर उन्हें निलंबित भी किया गया था।
इसके बावजूद, बीते अप्रैल माह में एक बार फिर राजेश पड़वार को ड्रग स्टोर का प्रभार सौंप दिया गया, जिससे विभागीय नियमों की अनदेखी के आरोप और गहरे हो गए।
स्पष्ट निर्देश, फिर भी अनदेखी
जेडी रीवा द्वारा जारी आदेश में साफ तौर पर उल्लेख किया गया था कि स्वास्थ्य संचालनालय ने फरवरी और मई में निर्देश दिए थे कि विगत 10 वर्षों में जो भी फार्मासिस्ट स्टोर प्रभारी रह चुका हो, उसे पुनः यह जिम्मेदारी न दी जाए। इसके बावजूद नियमों को दरकिनार करते हुए फिर से राजेश पड़वार को प्रभार सौंपा गया। इतना ही नहीं, आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि वर्तमान स्टोर प्रभारी राजेश पड़वार को हटाकर फार्मासिस्ट ग्रेड-2 प्रतिभा पाण्डेय को ड्रग स्टोर का नया प्रभार सौंपा जाए।
सिविल सर्जन की भूमिका पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि आदेश जारी हुए लंबा समय बीत जाने के बाद भी सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा इसे लागू नहीं कराया गया है। विभागीय गलियारों में इस देरी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर किन कारणों से सिविल सर्जन शासन और जेडी रीवा के आदेशों को जमीन पर उतारने में नाकाम नजर आ रहे हैं। यदि समय रहते इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो यह प्रकरण शासन स्तर तक तूल पकड़ सकता है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर और गंभीर प्रश्नचिह्न लगना तय माना जा रहा है।
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