गाजियाबाद
कोरियन ड्रामा और डिजिटल दुनिया में खोईं तीन बहनें
मोबाइल छीना, अकाउंट डिलीट हुआ,सदमे में उठाया खौफनाक कदम
गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में दर्दनाक घटना
आर्थिक तंगी, सोशल मीडिया की लत और पारिवारिक दूरी बनी वजह
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : भारत सिटी सोसाइटी में तीन सगी बहनों द्वारा आत्महत्या किए जाने की सनसनीखेज घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह मामला केवल पारिवारिक तनाव का नहीं, बल्कि आर्थिक तंगी, डिजिटल लत और भावनात्मक दूरी के खतरनाक मेल का परिणाम है।
सूत्रों के मुताबिक, तीनों बहनें सोशल मीडिया और कोरियन ड्रामा की दुनिया में इस कदर तक डूब चुकी थीं कि उन्होंने अपनी असली पहचान तक छोड़ दी थी। वे खुद को भारतीय कहलाना पसंद नहीं करती थीं और सोशल मीडिया पर कोरियन नामों से सक्रिय रहती थीं।
पिता की आर्थिक हालत बेहद खराब पिता चेतन कुमार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय थी। शेयर ट्रेडिंग में भारी नुकसान के बाद उन पर करीब दो करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। घर परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। हालात ऐसे थे कि बिजली का प्रीपेड बिल भरने के लिए उन्हें बेटियों का मोबाइल फोन तक ₹800 में बेचना पड़ा।
बताया जा रहा है कि मोबाइल ही लड़कियों की दुनिया का एकमात्र सहारा था, जिससे वे सोशल मीडिया और कोरियन ड्रामा देखती थीं।
सोशल मीडिया बनी ‘पहचान’
जांच में पता चला है कि तीनों बहनों का एक सीक्रेट सोशल मीडिया अकाउंट था, जिस पर हजारों फॉलोअर्स थे। वे अपनी प्रोफाइल और डिजिटल पहचान को लेकर बेहद संवेदनशील थीं। चर्चा है कि
प्रोफाइल फोटो हटने पर वे खाना तक नहीं खाती थीं।
करीब 10 दिन पहले पिता को कोरियन अकाउंट की जानकारी मिली तो उन्होंने अकाउंट डिलीट कर दिया और फोन भी अपने पास रख लिया। इसके बाद से बहनें गहरे सदमे में थीं।
खौफनाक रात की टाइमलाइन
शाम 7 बजे: पिता ने मोबाइल अपने पास रख लिया
रात 10 बजे: बच्चियों ने फिर फोन लिया और इस्तेमाल किया इसके उपरांत
रात 12 बजे: मां ने फोन वापस ले लिया
इसके बाद तीनों बहनें कमरे से निकलकर मंदिर वाले कमरे में गईं और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया
सुबह सवेरे उनके शव मिले
डायरी और व्यवहार से चौंकी पुलिस
पुलिस को लड़कियों की डायरी और ऑनलाइन गतिविधियों से कई चौंकाने वाली बातें पता चलीं।
असली नाम छोड़कर कोरियन नाम अपनाना ‘इंडियन’ शब्द से चिढ़, कोरिया जाने का सपना वास्तविक जीवन से दूरी । पुलिस टीम का मानना है कि यह मामला मानसिक और भावनात्मक अस्थिरता की ओर भी इशारा करता है मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चों में डिजिटल लत, सोशल मीडिया पर अत्यधिक निर्भरता और परिवार से संवाद की कमी गंभीर मानसिक तनाव पैदा कर सकती है। अचानक पाबंदियां या फोन छीनना बच्चों को गहरे सदमे में डाल सकता है।
घटना समाज के लिए एक चेतावनी का रुप
यह घटना अभिभावकों के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के साथ उनसे संवाद बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। आर्थिक तनाव और भावनात्मक दूरी का असर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर खतरनाक रूप से पड़ सकता है।



