गाजियाबाद
‘स्वच्छ भारत’ का सपना या कागजी हकीकत?
औरंगाबाद रिस्तल का सामुदायिक शौचालय खुद ही शौचालय तलाश रहा है!

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : सरकार ने गांव-गांव स्वच्छता की गंगा बहाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन योजना के अन्तर्गत सामुदायिक शौचालय बनवाए थे, लेकिन लोनी विकास खंड के औरंगाबाद रिस्तल में बना शौचालय अब खुद अपनी सफाई और किस्मत पर आंसू बहाता नजर आ रहा है। हालात ऐसे हैं कि शौचालय का उपयोग करना तो दूर, उसे देखकर ही लोग नाक-भौं सिकोड़ लेते हैं।
19 अक्टूबर 2020 को बड़े-बड़े मंच, फीता, तालियां और भाषणों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने इसका उद्घाटन किया था। उस दिन इसे स्वच्छता क्रांति की मिसाल बताया गया था। लेकिन अब यह शौचालय ‘क्रांति’ कम और ‘खंडहर’ ज्यादा नजर आता है।
देखरेख के अभाव में शौचालय की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि पानी की टंकी और पाइप तक चोरी हो गए। दरवाजे टूटे पड़े हैं, गेट गायब है, अंदर गंदगी का साम्राज्य है। कहने को यह सामुदायिक शौचालय है, लेकिन वर्तमान में यह केवल ‘सामुदायिक खंडहर’ बनकर रह गया है।
ग्रामीण तंज कसते हुए कहते हैं, “यहां सफाई की जगह सिर्फ बदबू मिलती है, और सुविधा की जगह परेशानी।” शौचालय कब से बंद है, इसका भी किसी को ठीक से पता नहीं। लगता है जैसे जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे भगवान भरोसे छोड़ दिया हो।
ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव पर भी ग्रामीणों का गुस्सा फूट रहा है। कई बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। समीक्षा बैठकों की फाइलें जरूर घूमती रहीं, लेकिन जमीनी हकीकत वहीं की वहीं रही। खंड विकास अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी की ‘नींद’ भी शायद अभी तक नहीं खुली।
हालात ये हैं कि लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया शौचालय बेकार पड़ा हुआ है और ग्रामीण फिर से खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। इससे बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन जिम्मेदारों के लिए यह शायद सिर्फ एक और कागजी योजना है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो जल्द ही शौचालय पर ‘यहां कभी स्वच्छ भारत मिशन का बोर्ड लगा था’ लिखकर इतिहास बना देना पड़ेगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस बदहाल शौचालय की सुध लेता है या फिर यह यूं ही सरकारी लापरवाही का स्मारक बनकर खड़ा रहेगा।



