बरेली

अबे ओ चीन, तू बड़ी बड़ी बातें मत बोल…

रिद्धिमा में  कवि सम्मेलन 'साहित्य सरिता' का आयोजन                                     

 नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली। एसआरएमएस रिद्धिमा के सभागार में गुरुवार (19 फरवरी 2026) को कवि सम्मेलन ‘साहित्य सरिता’ का आयोजन हुआ। इसमें पीलीभीत के कवि उमेश त्रिगुणायत”अद्भुत”, बरेली के हिमांशु श्रोत्रिय “निष्पक्ष”, पंतनगर के डॉ. केपी सिंह ‘विकल बहराइची’, बरेली की दीपा विरमानी, पीके दीवाना और डॉ संजय गुप्ता ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं के दिलों के भावों को जगाया। उमेश त्रिगुणायत ने ‘पहले सिजरा निकाल लेते हैं, लोग फिर हालचाल लेते हैं। उनके झांसे में आ गया जो भी, उसके खाते खंगाल लेते हैं, दुनियादारी से परिचित कराया। हिमांशु श्रोत्रिय ‘निष्पक्ष’ ने ‘क्या रक्षा की कोई आशा, हो सकती बटमारों से, संस्कृति कैसे रक्षित होगी,अति विकृत व्यवहारों से सुनाकर संस्कृति को संजोने का संदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने ‘पग पग पर कांटों के झुरमुट, अगर बिछाए जाएंगे, तुलसी के चौरे पर हठकर, अगर बबूल सजाएंगे, माली वैमनस्य यदि पाले, मन में स्वयं बहारों से, संस्कृति कैसे रक्षित होगी, अति विकृत व्यवहारों से’ सुनाया। पीके ‘दीवाना’ ने ‘अबे ओ चीन, तू बड़ी -बड़ी बातें मत बोल, बोलने से पहले अपनी छोटी- छोटी आंखें पूरी तरह से तो खोल, जिस रोज तेरी ये आंखें पूरी तरह से खुल जाएंगी, मेरा दावा है, हिन्द के प्रति तेरी सारी गलत फहमियां धूल जाएंगी, सुनाकर श्रोताओं को देशप्रेम से रंगा। कवियत्री दीपा विरमानी ने ‘जो वर राघव बने होंगे, हृदय हर्षित हुआ होगा खिले होंगे, पुष्प मन में मेल नैनों का हुआ होगा, सुना है हर खुशी और गम में, आंसू साथ देते हैं स्वयंवर के बाद, आंसू सिया का भी गिरा होगा से भगवान श्रीराम और माता सीता का प्रसंग सुनाया। एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के आर्थोपेडिक डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. संजय गुप्ता ने ‘मूक स्वरों से मुझे पुकारो, मैं भावों को पढ़ लूंगा, मन को छूते अहसासों से शब्द स्वयं ही गढ़ लूंगा सुनाकर श्रोताओं की तालियां हासिल की। कवि केपी सिंह “विकल” ने ‘हौसले से समंदर उतर जाओगे, मंजिले पास होंगी संवर जाओगे, धैर्य टूटा अगर पथ से विचलित हुए, टूटकर एक दिन तुम  बिखर जाओगे’ सुनाकर निराशा से निकलने का संदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने मात दुर्गे की अवतार हैं बेटियां, सृष्टि की श्रेष्ठ श्रंगार हैं बेटियां, सत्य शिव की जटा से निकलती हुई, पावनी गंग की धार हैं बेटियां’ सुनाकर बेटियों के महत्व को स्थापित किया। इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चैयरमेन देव मूर्ति जी, आशा मूर्ति जी, आदित्य मूर्ति जी, ऋचा मूर्ति जी, देविशा मूर्ति जी, सुभाष मेहरा, डा. प्रभाकर गुप्ता, डा. अनुज कुमार, डा. शैलेश सक्सेना, डा. आशीष कुमार, डा. रीता शर्मा मौजूद रहे।
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