भरत पुर
तन्त्र मंत्र और साधना के लिए श्रेष्ठ होलाष्टक हुए शुरू
होलिका दहन तक शुभ मांगलिक कार्यों पर लगेगी रोक

भगवान की भक्ति,तप और दान पुण्य के लिए विशेष फलदायी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
भरतपुर। होली का त्योहार आने से ठीक आठ दिन पहले होलाष्टक शब्द होली और अष्टक (आठ) से मिलकर बना है। जहां होलाष्टक की शुरुआत इस महीने 24 फरवरी मंगलवार को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से सुबह 07 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर 3 मार्च पूर्णिमा को सांयकाल 05 बजकर 11 मिनट तक होलिका दहन तक चलने वाली इस अवधि में सभी शुभ मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। वहीं दूसरी ओर विद्वान पंडितों ने जानकारी देते हुए बताया कि होलाष्टक को एक दोष की अवधि माना जाता है। इस लिए होलाष्टक के दौरान विवाह, सगाई,जनेऊ, नामकरण और मुण्डन जैसे सोलह संस्कार,वाहन व भूमि क्रय नहीं करने के साथ नया व्यापार शुरू करना या ग्रह प्रवेश कष्ट कारी हो सकता है। वहीं नवविवाहिताओं को होलाष्टक की अवधि में अपने मायके में बितानी चाहिए। वहीं उन्होंने बताया कि होलाष्टक शुभ कार्यों के लिए वर्जित है, लेकिन व्रत,पूजन,हवन और साधना के लिए यह समय अत्यंत (श्रेष्ठ) महत्वपूर्ण माना गया है। इस होलाष्टक के दौरान भगवान की भक्ति करने से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। और तांत्रिक दृष्टि से यह समय सिद्धियों और साधनाओं के लिए उपयुक्त माना जाता है,, लेकिन शुभ कार्यों के लिए नहीं। वहीं पूर्णिमा 02 मार्च को सांयकाल 05 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर 03 मार्च को सांयकाल 05 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। वहीं 02 मार्च को पूर्णिमा के साथ ही सांयकाल 05 बजकर 59 मिनट से भद्रा आरम्भ होगा जो कि 03 मार्च की सुबह 05 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। वहीं होलाष्टक में हमें धैर्य और भक्ति का संदेश देता है ।यह समय अपनी वासनाओं और बुराईयों को जलाने की तैयारियों का है।



