
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बोकारो। ग्रामीण विकास विशेष प्रमण्डल, बोकारो के अंतर्गत कसमार और जरीडीह प्रखंड की सीमा पर गवई नदी (गट्टीगढ़ा एवं रोरिया के बीच) बन रहे पुल के निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और लापरवाही का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने संवेदक पर मनमानी और वादे खिलाफी का आरोप लगाते हुए निर्माण कार्य को पूरी तरह ठप कर दिया है।
सोलर प्लेटों को पहुँचा नुकसान
ग्रामीणों का मुख्य आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान भारी मशीनों द्वारा पत्थर तोड़ने के दौरान कृषि विभाग द्वारा ‘किसान समृद्धि सोलर पंप सेट योजना’ के तहत लगाए गए सोलर प्लेटों को क्षतिग्रस्त हो गया हैं। जिससे फसलों में समय अनुसार पानी नहीं मिला और पूरी तरह से फसल नष्ट हो गए और अभी भी सब्ज़ी नहीं लगा पाए है।
ग्रामीणों ने बताया कि:
ठेकेदार ने 5 महीने पहले क्षतिग्रस्त सोलर प्लेटों की मरम्मत कराने का आश्वासन दिया था, जो आज तक अधूरा है।
सिंचाई का साधन ठप होने से किसानों को खेती में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों (गट्टीगढ़ा के निवासियों) को काम पर न लगाकर बाहर के मजदूरों से काम कराया जा रहा है, जिससे स्थानीय महिलाओं में रोष है।
“5 महीने पहले ठेकेदार ने वादा किया था कि सोलर प्लेट ठीक करा दी जाएगी, लेकिन अब वह सुध तक नहीं ले रहा। जब तक हमारा नुकसान भरपाई नहीं होता और स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलता, काम शुरू नहीं होने देंगे।” — स्थानीय ग्रामीण
पिछले वर्ष हुआ था भव्य भूमि पूजन
विदित हो कि इस पुल का भूमि पूजन 05 जून 2025 को बड़े ही धूमधाम से किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री योगेन्द्र प्रसाद (माननीय मंत्री, पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग, झारखंड सरकार) उपस्थित थे। साथ ही, श्री चन्द्र प्रकाश चौधरी (माननीय सांसद, गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र) की गरिमामयी उपस्थिति में विकास की नई इबारत लिखने का दावा किया गया था।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग
भूमि पूजन के एक साल के भीतर ही योजना विवादों के घेरे में आ गई है। किसानों का कहना है कि सरकार एक तरफ ‘किसान समृद्धि योजना’ से लाभ दे रही है, तो दूसरी तरफ विभाग की लापरवाही से वह लाभ मिट्टी में मिल रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द फसल और सोलर प्लेटों के मुआवजे का आकलन कर भुगतान किया जाए, अन्यथा आंदोलन और उग्र होगा। मौके पर दर्जनों ग्रामीण महिला एवं पुरूष मौजूद थे।



