असम सरकार ने हाजो वन रेंज में कथित रिश्वतखोरी के आरोपों के बाद तेज कार्रवाई की।
वनमंत्री जयंत मल्ल बरुवा की सराहना।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम सरकार ने हाजो वन रेंज में ट्रक-डम्पर चालकों द्वारा लगाए गए अवैध वसूली के गंभीर आरोपों के सामने रखते हुए त्वरित और निर्णायक कदम उठाए हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के आदेशानुसार हाजो वन रेंज अधिकारी प्रांजल बर्मन को नॉर्थ कामरूप डिवीजन से तत्काल प्रभाव से अपर-असम सर्कल, जोरहाट के वर्किंग प्लान ऑफिस में स्थानांतरित कर दिया गया है। साथ ही नॉर्थ कामरूप डिवीजन के फारेस्टर- I इम्तियाज अहमद को विभागीय कार्यवाही तक निलंबित कर दिया गया है। डम्पर मालिकों ने आरोप लगाया था कि पिछले लगभग दो वर्षों से वन क्षेत्रों से बालू निकालने में संलग्न वाहनों से नियमित रूप से अवैध धनराशि वसूली जा रही थी। शिकायतकर्ता के अनुसार हाजो वन रेंजर मासिक आधार पर निजी तौर पर रु. 3,500 वसूलते थे तथा रूटीन चेक के दौरान रु. 500 से रु. 1,500 तक और लिए जाते थे। अली ने यह भी खुलासा किया कि ये वसूली सरकारी कर नहीं बल्कि व्यक्तिगत मांगें थीं और उनके पास पिछले दो वर्षों के भुगतान के रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिन्हें वे जाँच एजेंसियों को सौंपने के लिए तैयार हैं।असम के वित्त, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन आदि विभाग के मंत्री जयंत मल्ल बरुवा ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई की प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से साझा की और स्पष्ट किया कि रिपोर्ट आने पर सरकार ने शीघ्र कदम उठाए। मंत्री मल्ल बरुवा ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अवैध वसूली और अन्य अनियमितताओं के संबंध में प्राप्त शिकायतों के बाद तुरंत निर्देश दिए गए और संबंधित अधिकारियों पर आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई गई। उन्होंने यह भी दोहराया कि किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं रखा जाएगा और अपने पद का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के नेतृत्व में इस तेज और पारदर्शी कदम की स्थानीय समुदाय और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने मंत्री की सराहना की है। इस कार्रवाई को असम सरकार की शून्य सहनशीलता नीति — भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस — का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया जा रहा है। प्रभावित पक्षों का कहना है कि दोषियों की निष्पक्ष जांच और सख्त जवाबदेही से वन संसाधनों के संरक्षण और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।सरकार ने कहा है कि जांच निष्पक्ष एवं त्वरित रूप से की जाएगी और जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाए गए, उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक तथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कदम से स्पष्ट संदेश गया है कि राज्य प्रशासन वन क्षेत्र में होने वाली किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगा और लोगों के हक के प्रति संवेदनशील रहेगा। लोगों में उम्मीद जगी है कि मंत्री जयंत मल्ल बरुवा आने वाले समय में भष्टाचार के ऊपर ऐसे ही कड़ी से कड़ी कदम उठायेगी। अब वन विभाग में चल रहे कई अनैतिक कार्य के ऊपर आने वाले समय में मंत्री जयंत मल्ल बरुवा सही में ऐसे ही कदम उठाते रहेंगे या नही ये आने वाले वक्त ही बतायेगा।


