रूसी सेना में फंसे नागरिकों की रिहाई जारी
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने कई अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा। यूक्रेन के पास जहाज पर हुए हमले में दो भारतीय अब भी लापता हैं। वहीं, रूसी सेना में फंसे भारतीयों की रिहाई, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों, अमेरिकी सीनेट के विधेयक, पीओजेके की स्थिति और एमनेस्टी रिपोर्ट पर भी सरकार ने रुख स्पष्ट किया। विदेश मंत्रालय ने किन मुद्दों पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कई अहम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए जहाज एमवी एजीएन रैगनर पर हमले के बाद चालक दल में शामिल चार भारतीयों में से दो सुरक्षित हैं, जबकि दो अब भी लापता हैं। इसके अलावा रूसी सेना में फंसे भारतीय नागरिकों की रिहाई, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की स्थिति, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, अमेरिकी सीनेट के विधेयक और एमनेस्टी रिपोर्ट पर भी विदेश मंत्रालय ने सरकार का पक्ष रखा।
रणधीर जायसवाल ने बताया कि 25 जुलाई को ओडेसा बंदरगाह से रवाना हो रहे एमवी एजीएन रैगनर पर हमला हुआ था। जहाज पर चालक दल के सदस्य के रूप में चार भारतीय मौजूद थे। इनमें से दो सुरक्षित हैं, जबकि दो भारतीय अब भी लापता हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन और रोमानिया, दोनों पक्षों की ओर से खोज एवं बचाव अभियान चलाया गया है। भारत लगातार दोनों देशों के संपर्क में है ताकि लापता भारतीयों के बारे में जानकारी मिल सके। विदेश मंत्रालय उनके परिवारों के संपर्क में भी है और उन्हें हरसंभव सहायता दी जा रही है।
रूसी सेना में फंसे भारतीयों की रिहाई पर क्या बोला मंत्रालय?
विदेश मंत्रालय ने बताया कि रूसी सेना में मौजूद भारतीय नागरिकों की रिहाई के लिए रूस के साथ लगातार संपर्क बना हुआ है। अब तक 139 भारतीय नागरिकों की रिहाई कराई जा चुकी है।
मंत्रालय ने कहा कि अभी भी रूसी सेना में बताए जा रहे करीब दो दर्जन भारतीयों की रिहाई के प्रयास जारी हैं।
साथ ही लोगों को ऐसे नौकरी के प्रस्तावों से सावधान रहने की सलाह दी गई, जो जोखिम भरे हों और संदिग्ध एजेंसियों द्वारा दिए जाते हों।



