राम वनवास की लीला ने दर्शकों को किया भावुक
कैकेयी के दो वचन मांगने और श्रीराम के वन जाने का हुआ मंचन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
शामली। हनुमान टीला स्थित हनुमान धाम में चल रहे 57वें रामलीला महोत्सव में देर रात राम वनवास की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कैकेयी के दो वचन मांगने, राजा दशरथ के व्याकुल होने और भगवान श्रीराम के पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वन जाने के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
लीला का शुभारंभ राजा दशरथ के उस प्रसंग से हुआ, जिसमें वह स्वयं को वृद्ध देखकर श्रीराम को राजगद्दी सौंपने का निर्णय लेते हैं। मंत्री सुमंत से विचार-विमर्श के बाद राज्य में अगले दिन श्रीराम के राजतिलक की घोषणा कर दी जाती है। राजतिलक की खबर सुनकर मंथरा कैकेयी को भड़काती है। उसके बहकावे में आकर कैकेयी अपने दो पुराने वचन मांगने का निर्णय लेती हैं।
कैकेयी राजा दशरथ से भरत को राजगद्दी देने और श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास देने की मांग करती हैं। यह सुनकर राजा दशरथ व्याकुल हो उठते हैं और कैकेयी से निर्णय बदलने की विनती करते हैं, लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी रहती हैं। रघुकुल की मर्यादा निभाने के लिए राजा दशरथ वचन देने की विवशता के कारण दुखी हो जाते हैं।
पिता की व्याकुलता का कारण जानने पर श्रीराम को कैकेयी की मांग का पता चलता है। वह बिना किसी विरोध के पिता की आज्ञा स्वीकार कर वन जाने के लिए तैयार हो जाते हैं। माता सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने का निर्णय लेते हैं। सीता पति के साथ सुख-दुख में रहने की बात कहती हैं, जबकि लक्ष्मण श्रीराम की सेवा में साथ रहने की इच्छा जताते हैं। इसके बाद श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वन प्रस्थान का मंचन किया गया।
राजा दशरथ की भूमिका रवि पाठक, कैकेयी की भूमिका वशिष्ठ निरवाल, सुमंत की भूमिका विपिन शांडिल्य, लक्ष्मण की भूमिका उज्ज्वल नामदेव और माता सीता की भूमिका वंश राजपूत ने निभाई। मंच संचालन उत्तम नामदेव और लोकेश शर्मा ने किया। इस अवसर पर सलिल द्विवेदी, राजकुमार मित्तल, पंडित दिनेश पाठक, आदेश शर्मा, लाल सिंह लचक, दीपक सैनी, वंश नामदेव, रमेश धीमान, सुनील कुमार टम्मी, संजीव वर्मा, रोहित संगल, अमित प्रजापति, पुनीत द्विवेदी और शरद द्विवेदी मौजूद रहे।



