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अंकुर विहार थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर घमासान

पार्षदों और सामाजिक संगठनों ने उठाए गंभीर सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी/गाजियाबाद। गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट के अंतर्गत आने वाले अंकुर विहार थाने के प्रभारी योगेंद्र पवार की कार्यशैली को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई पार्षदों तथा सामाजिक संगठनों ने पुलिस आयुक्त को शिकायत पत्र भेजकर थाना प्रभारी पर अधिकारों के दुरुपयोग, पक्षपातपूर्ण कार्रवाई और अपराधियों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ  ही इस थाने से सम्बंधित मामले की जांच करते हुए  तत्काल हटाने की मांग  की गई है।
पार्षदों ने निष्पक्ष कार्रवाई पर उठाए सवाल
वार्ड-33 डीएलएफ के पार्षद राम निवास त्रिपाठी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि अंकुर विहार थाने में निष्पक्ष न्याय के बजाय फर्जी मुकदमे दर्ज करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उनका कहना है कि थाने में अपनी शिकायत लेकर आने वाले लोगों को परेशान किया जाता है, जबकि असामाजिक तत्वों को पुलिस का संरक्षण मिल रहा है।
वहीं वार्ड-41 के पार्षद अंकुश जैन ‘मिंकू’ ने थाना पुलिस की कार्यप्रणाली को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा कि राजनीतिक प्रभाव में निर्दोष लोगों पर अंकुर बिहार थाने में मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ भी बिना पर्याप्त साक्ष्यों के मामला दर्ज किया गया। उन्होंने क्षेत्र में सक्रिय भू-माफियाओं और अपराधियों के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता जताई।
कानून-व्यवस्था को लेकर सामाजिक संगठनों की नाराजगी
राष्ट्रवादी सवर्ण महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. सतीश शर्मा ने पुलिस आयुक्त को भेजे पत्र में आरोप लगाया कि अंकुर विहार क्षेत्र में चोरी, लूट और जमीनों पर अवैध कब्जे की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि पीड़ितों को राहत मिलने के बजाय पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्वर्ण समाज के लोगों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। महासंघ ने पूरे मामले की निष्पक्ष और गोपनीय जांच कराने की मांग उठाई है।
शिकायतों में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
निर्दोष लोगों और जनप्रतिनिधियों पर कथित फर्जी मुकदमे दर्ज करना
क्षेत्र में बढ़ती चोरी और लूट की घटनाओं पर नियंत्रण न होना
भू-माफियाओं से मिलीभगत के आरोप
पुलिस के प्रति जनता में बढ़ता अविश्वास और भय का माहौल
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की ओर से उठाई गई इन शिकायतों के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों और शासन स्तर तक मामला ले जाएंगे। अब सभी की नजर पुलिस आयुक्त कार्यालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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