मेरे बिना इस्राइल नहीं होता
ईरान के साथ डील पर बोले ट्रंप- हम तेहरान में एक भी पैसा नहीं कर रहे निवेश

एवियन । जी-7 शिखर सम्मेलन से पहले ट्रंप और कतर के अमीर के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। इस दौरान ईरान के साथ शांति समझौते पर इस्राइल के मत को लेकर ट्रंप ने कहा- ‘मेरे बिना इस्राइल नहीं होता, क्योंकि कोई दूसरा राष्ट्रपति वह करने को तैयार नहीं था जो मैंने किया’। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के समर्थन के बिना इस्राइल का अस्तित्व और सुरक्षा बेहद कठिन हो जाती।
फ्रांस के एवियन शहर में जी-7 शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक में पश्चिम एशिया की सुरक्षा, अमेरिका-ईरान समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक के दौरान ट्रंप ने हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि यह समझौता सफल होना चाहिए और इसके अगले चरण की बातचीत पहले से भी आसान हो सकती है। ट्रंप ने उन खबरों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका ईरान में धन निवेश करेगा। बता दें कि, बीते राष्ट्रपति ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने शांति समझौते पर डिजिटल तरीके से हस्ताक्षर किए हैं।
हम ईरान में कोई पैसा निवेश नहीं कर रहे हैं- ट्रंप
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस दौरान कहा, ‘हमने ईरान के साथ डील कर ली है और यह सफल होनी चाहिए। अब यह दूसरे चरण में जाएगी, जो मुझे लगता है कि असल में आसान होगा। मैं पिछले हफ्ते उन पर हमला नहीं करना चाहता था, लेकिन हमारे पास कोई चारा नहीं था। और असल में हमने दो बार ऐसा किया। हम तीसरी बार भी ऐसा करने जा रहे थे, लेकिन हमें ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन हमारी डील एक निष्पक्ष डील है। यह एक अच्छी डील है। हम ईरान में कोई पैसा निवेश नहीं कर रहे हैं। हमारे पास किसी दिन अंदर जाकर कार्रवाई करने का अधिकार है, अगर मैं कुछ करना चाहूं या कोई और कुछ करना चाहे। लेकिन हम कोई पैसा निवेश नहीं कर रहे हैं। ईरान में पैसा निवेश करने की हमारी कोई बाध्यता नहीं है’।
‘िपरमाणु हथियार बनाने-हासिल करने पर ईरान भुगतेगा बुरे नतीजे’
ट्रंप ने आगे कहा, ‘मेरे लिए सबसे जरूरी बात यह है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न हों। और यह बात साफ-साफ कही गई है। वे इसे न तो बनाएंगे, न ही खरीदेंगे और न ही इसका इस्तेमाल करेंगे। और अगर वे ऐसा करते हैं, तो उन्हें बहुत बुरे नतीजे भुगतने होंगे। मैं आपको उन नतीजों के बारे में बताऊंगा भी नहीं, लेकिन वे नतीजे बहुत ही गंभीर होंगे। इसके बावजूद, मुझे उम्मीद है कि हमारे रिश्ते बहुत अच्छे रहेंगे। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि उनके पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। और यही वजह है कि मैं इसमें शामिल हुआ और मैंने समझौते पर दस्तखत करने का फैसला किया’। ट्रंप ने आगे कहा, ‘मैंने कभी सत्ता बदलने की परवाह नहीं की। यह कभी भी इसका हिस्सा नहीं रहा… हम ऐसे लोगों से बात कर रहे हैं जो मुझे बहुत समझदार लगते हैं। और उनके साथ बातचीत करना अच्छा रहा। वे मजबूत और समझदार लोग थे। असल में, मुझे लगता है कि वे पहले और दूसरे ग्रुप के लोगों से ज्यादा समझदार हैं। लेकिन वे कट्टरपंथी नहीं हैं और अपने देश की मदद करना चाहते हैं। मैं सत्ता बदलने में यकीन नहीं रखता’।
अब रूस-यूक्रेन जंग पर ट्रंप की निगाह
वहीं रूस-यूक्रेन जंग पर ट्रंप ने कहा कि, ‘रूस को समझौता कर लेना चाहिए। रूस और यूक्रेन, दोनों ने ही बहुत सारे लोग खोए हैं। पिछले महीने, दोनों तरफ मिलाकर 35,000 सैनिक मारे गए। यह हर महीने हो रहा है। और वहां जो हो रहा है, वह पागलपन है। हमारी एक मीटिंग हुई थी और मैंने रविवार को राष्ट्रपति पुतिन से बात की थी। और बात वही है। मतलब, वे बस लड़ते जा रहे हैं और सैनिक खोते जा रहे हैं। दूसरे विश्व युद्ध के बाद से ऐसा कुछ नहीं हुआ है। मैंने आठ युद्ध सुलझाए हैं। मुझे लगा था कि इसे सुलझाना सबसे आसान होगा। दोनों नेताओं के बीच काफी मनमुटाव है। लेकिन मैं आज बाद में उनसे फिर मिल रहा हूं’।
औपचारिक हस्ताक्षर के बाद ही सार्वजनिक होगा समझौता- ट्रंप
वहीं, ईरान के साथ औपचारिक हस्ताक्षर पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि समझौते का पूरा हिस्सा शुक्रवार को जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर के बाद सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि उपराष्ट्रपति वेंस हस्ताक्षर समारोह में शामिल होंगे, जबकि उनकी अपनी उपस्थिति अभी तय नहीं है। ट्रंप ने इस समझौते को क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने वाला महान समझौता बताया है। उनका दावा है कि इसके लागू होने के बाद क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बड़ा लाभ मिलेगा तथा लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने में मदद मिलेगी। ट्रंप ने ये भी कहा कि शुक्रवार तक होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुल जाएगा।
तेहरान को मिलने वाले आर्थिक मदद पर क्या बोले थे ट्रंप
ट्रंप ने 2015 के न्यूक्लियर समझौते के लिए राष्ट्रपति बराक ओबामा की कड़ी आलोचना की थी। ट्रंप का तर्क था कि यह समझौता तेहरान को हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ने से रोकने में नाकाम रहा और इससे इस्लामिक रिपब्लिक के खजाने में अरबों डॉलर पहुंचे। 2018 में, ट्रंप इस समझौते से बाहर हो गए, जिसे ‘ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान आॅफ एक्शन’ (जेसीपीओए) के नाम से जाना जाता है। ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और यूरोपीय संघ भी इस समझौते में शामिल थे।


