
कलाएं जीवन को सुंदर, सुखमय और रसमय बनाती है
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
ललितपुर। सिद्धन रोड स्थित कला भवन में वरिष्ठ कलाविद् ओमप्रकाश बिरथरे द्वारा आयोजित एक माह के विशिष्ट कला शिविर पेन्टिंग विद आयल कलर्स का भव्य समापन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि केन्द्रीय विद्यालय की प्राचार्या मिनी वर्मा तथा अध्यक्षता कर रहीं पूर्व प्रधानाचार्या शांति मालवीय द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। शिविर के आयोजक ओमप्रकाश बिरथरे ने बताया कि 24 मई से 21 जून तक आयोजित इस शिविर में प्रतिभागियों को तैल चित्रकला का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने बताया कि तैल चित्रकला की शुरुआत सातवीं शताब्दी में अफगानिस्तान के बामियान क्षेत्र से मानी जाती है, जहां अलसी, अखरोट और खसखस के तेलों से बने रंगों का प्रयोग किया गया था। बाद में लियोनार्डो दा विंची, पाब्लो पिकासो, विंसेंट वैन गॉग, माइकल एंजेलो तथा भारत में राजा रवि वर्मा जैसे कलाकारों ने इस कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने बताया कि शिविर में प्रतिभागियों को तैल रंगों की पहचान, कैनवास तैयार करने की विधि, रंग संयोजन तथा चित्रांकन की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान हिंदी-अंग्रेजी कैलीग्राफी, शकुंतला चित्रण, प्रकृति चित्रण तथा गौरी-गणेश बुंदेली लोक चित्रण जैसे विषयों पर अभ्यास कराया गया। समापन अवसर पर कलासाधकों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे देखकर अतिथि एवं दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। मुख्य अतिथि मिनी वर्मा ने कहा कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती है। उन्होंने हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन का उल्लेख करते हुए कहा कि कलात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी जैविक उम्र बढऩे की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक होती है। उन्होंने शिविर में तैयार किए गए चित्रों की सराहना करते हुए इसका श्रेय प्रशिक्षक ओमप्रकाश बिरथरे के मार्गदर्शन को दिया। अध्यक्षता कर रहीं सेवानिवृत्त प्रधानाचार्या शांति मालवीय ने कहा कि ओमप्रकाश बिरथरे वर्ष 2014 से लगातार ग्रीष्मकालीन कला शिविरों का आयोजन कर बच्चों और युवाओं को मोबाइल एवं रील संस्कृति से दूर रखकर रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ रहे हैं, जो सराहनीय कार्य है। इंटैक चैप्टर संयोजक संतोष शर्मा ने कहा कि शिविर में तैयार की गई कलाकृतियां प्रतिभागियों की मेहनत और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कलाकारों से निरंतर कला साधना जारी रखने का आह्वान किया। कार्यक्रम में 32 कलासाधकों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस दौरान कलासाधक सिद्धार्थ सक्सेना ने कला भवन का प्रतिरूप अपने गुरु ओमप्रकाश बिरथरे को भेंट किया। समारोह में कवि अखिलेश शांडिल्य, कवि रवीन्द्र पाठक, अरमान कुरैशी, योगाचार्य अनुराग चतुर्वेदी, रवि चुनगी तथा कृष्णकांत सोनी ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में विनोद त्रिपाठी, गोविन्द नारायण व्यास, मुकेश साहू, शैलेष जैन, वैभव जैन, गिरीश साहू, जयंत चौबे, तरुण जामकर, सुरभि जामकर, राजरानी त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में अभिभावक एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि मिनी वर्मा का स्मृति चिन्ह एवं बैज अलंकरण कर सम्मान किया गया। आयोजन में महेश बिरथरे का विशेष योगदान रहा, जबकि संचालन संस्कार भारती के अध्यक्ष ब्रजमोहन संज्ञा ने किया।



